aiib_china100 बिलियन डॉलर के एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक(एआईआईबी) समझौते पर रजामंदी,

ंनई दिल्ली, 29 जून. भारत समेत दुनिया के 50 देशों ने सोमवार को चीन सरकार के समर्थन से बन रहे 100 बिलियन डॉलर के एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक(एआईआईबी) समझौते पर रजामंदी दे दी. सभी देशों के बीच यह सहमति 60 बिन्दुओं पर बनी है. इन बिन्दुओं में सभी देशों की हिस्सेदरी और बैंक के कामकाज करने के नियमों का पूरा ब्यौरा है.

चीन सरकार की पहल पर एशिया क्षेत्र में इंफ्रा प्रोजेक्ट्स की फंडिंग करने के लिए एशिया बैंक (एआईआईबी) को बनाया जा रहा है. इस समझौते के लिए सभी मेंबर देशों के सदस्य बीजिंग के द ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में एकत्र हुए थे. एशिया बैंक के 50 मेंबर देशों में ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले इस समझौते पर अपनी रजामंदी दी है और उम्मीद की जा रही है कि 7 अन्य देश इस साल के अंत तक इस बैंक में शामिल हो सकते हैं. इस समझौते के मुताबिक ्रएआईआईबी के पास 100 बिलियन डॉलर का फंड मौजूद रहेगा. इस फंड का लगभग 70 फीसदी हिस्सा एशियाई देशों से आएगा. साथ ही एशियाई देशों को उनके आर्थिक आकार के आधार पर वोटिंग अधिकार मिलेंगे.

चीन, रूस और भारत सबसे बड़े हिस्सेदार– एशिया बैंक में चीन के साथ-साथ रूस और भारत की बड़ी हिस्सेदारी है. करार के मुताबिक चीन के पास बैंक का 30.34 फीसदी शेयर रहेगा वहीं रूस और भारत के पास क्रमश: 8.52 और 6.66 फीसदी शेयर रहेंगे. इस आधार पर इन तीनों देशों का बैंक के फैसलों में वोटिंग अधिकार क्रमश: 26.06 फीसदी, 7.5 फीसदी और 5.92 फीसदी है.

एशिया के विकास में होगा साझा प्रयास – चीन के नेतृत्व में बन रहे इस एशिया बैंक का प्रमुख उद्देश्य एशिया क्षेत्र में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करना है. 50 देशों के बीच हुए समझौते के मुताबिक इस साल के अंत तक यह बैंक अपना कामकाज शुरू कर देगा. गौरतलब है कि इस समझौते को अब सभी देश अपने-अपने देशों में कानूनी वैद्यता देते हुए लागू कराएंगे.

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