जबसे भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता देने का प्रस्ताव आया और उसे भरपूर समर्थन मिल गया- तब से पाकिस्तान और चीन में बड़ी राजनैतिक बैचेनी आयी हुई है. भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की हाल की 4 देशों की यात्रा अफगानिस्तान की यात्रा पड़ोसी व्यवहार की रही. वहीं स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मेक्सिको ने भारत को न्यूक्लियर सप्लायरी ग्रुप की सदस्यता देने का पूरा समर्थन व्यक्त किया.

प्रतिस्पर्धा में पाकिस्तान भी यह कह रहा है कि उसे भी न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता दी जाये. चीन कूटनीतिक भाषा में कह रहा है कि भारत को इस ग्रुप की सदस्यता नहीं दी जानी चाहिए और यदि दी जाती है तो पाकिस्तान को भी इस ग्रुप का सदस्य बनाया जाए.

पाकिस्तान के विदेश सचिव श्री एजाज अहमद चौधरी पाकिस्तान के उच्च सदन जिसे सीनेट कहा जाता है, उसमें कहा कि चीन इन दिनों पाक अधिकृत काश्मीर से होकर पाकिस्तान के पश्चिमी तट पर ईरान केें बिल्कुल पास ग्वादर बंदरगाह तक जो सड़क मार्ग का गलियारा बना रहा है उसे अमेरिका पसंद नहीं करता है और उसने पाकिस्तान से दूरी बना ली है.

अभी श्री मोदी ईरान की यात्रा पर गये थे और भारत, अफगानिस्तान व ईरान ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के निकट ईरान की सीमा में चौबहार बन्दरगाह बनाने का करार कर लिया इससें भारत बिना पाकिस्तान जाए अफगानिस्तान से जुड़ गया और सबसे बड़ी बात यह हो गयी कि चौबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान भी अब ‘लैंड लाक्डÓ देश नहीं रहा जो उसे समुद्र मार्ग मिल गया. इसे इन तीनों देशों का चीन व पाकिस्तान का ग्वादर का जवाब माना जा रहा है.

उत्तर प्रशांत महासागर में जिसमें चीन के अलावा कई देश जापान, उत्तर व दक्षिण कोरिया, फिलीपीन्स, वियतनाम, इंडोनेशिया आते हैं और संसार का 70 प्रतिशत समुद्र मार्गी व्यापार है इस पर चीन अपना प्रभुत्व जमाना चाहता है. उसकी महत्वाकांक्षा यहां तक हो गयी है कि उत्तर व दक्षिण चीन सागरों के कारण उसे प्रशांत महासागर के बजाय चीन महासागर कहा जाए. भौगोलिक रचना में प्रशांत महासागर के तीन और महासागर हिंद महासागर, अटलांटिक और आर्कटिक महासागर हैं.

इस समय विश्व राजनीति में दो महाशक्ति अमेरिका व रूस एक लंबे अरसे से बने हुए हैं और नये परिवेश में एशिया में भारत और चीन दो दिग्गज राष्टï्र के रूप में उभर के सामने आये हैं. चीन की प्रशांत महासागर पर कब्जादारी को रोकने के लिये दो राष्टï्र जापान और भारत एक साथ हो गये हैं और उसके साथ अन्य राष्टï्र दक्षिण कोरिया, फिलीपींस इंडोनेशिया व वियतनाम भी साथ है. अमेरिका का इस महासागर में काफी बड़ा समुद्री व्यापार है वह फिर भारत और जापान के साथ जुड़ गया है.

चीन भारत के साथ उसके सीमा विवाद की शत्रुता में भारत के चिर शत्रु पाकिस्तान के साथ जुड़ गया और प्रशांत न सिर्फ प्रशांत देशों का मामला है बल्कि पूरे विश्व के व्यापारिक हित का प्रश्न है इसलिए सभी राष्टï्र एशिया की राजनीति में भारत और जापान के साथ है. एशियाई व प्रशांत क्षेत्र में भारत की इस समय विश्व स्तर की राजनीति व सैन्य शक्तियों और उसकी भूमिका भी बहुत अहम् हो गई है.

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