ङ्क्षवध्य व मालवा में आक्रोश, सीएम को खुद आना पड़ा सामने

भोपाल, सरकार की महत्वाकांक्षी भावांतर योजना पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. भंवर कुछ ऐसी है कि अफसरों ने जल्दबाजी में करीब 33 लाख किसानों का पंजीयन किये बिना योजना को लागू कर दिया.

अपने भी साध रहे निशाना

राजधानी की करोंद मंडी से शुरू हुआ बवाल मालवा व ङ्क्षवध्य के किसानों को आक्रोशित कर रहा है, जबकि अपनों ने भी सरकार को निशाने पर लिया. स्थिति यह बनी कि सीएम खुद जिला कलेक्टरों से बात कर रहे हैं. सरकार ने भावांतर योजना को लेकर जो घोषणायें की थीं, वह किसानों को उत्साहित कर रही थी, जिसमें 50 हजार रुपये नगद भुगतान की बात कही गई थी. मंडी खुली तो खरीदी व्यापारियों के हाथ आ गई.

पहले दिन ही करोंद मंडी में भाव को लेकर बवाल हुआ और भारतीय किसान यूनियन के तीन नेताओं की गिरफ्तारी कर ली गई. मंडी सचिव की यह ना-समझी सरकार पर भारी पड़ सकती है. क्योंकि भारतीय किसान यूनियन ही वह संगठन है, जिसने जून में हाहाकार आंदोलन किया और छह जून को मन्दसौर में किसानों पर गोली चल गई, जिसके बाद मालवा सुलग उठा.

किसानों को राहत देने के लिये सरकार योजनायें बनाने लगी, जिसमें भावांतर योजना का उदय हुआ, जिसका विरोध खुद कृषि मंत्री डॉ. गौरीशंकर बिसेन ने किया था.

गत दिवस कैबिनेट में यह कह कर किया कि भावांतर के स्थान पर समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाये. पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने भी योजना को अंजाम देने वाले डॉ. राजेश राजौरा पर निशाना साधा. स्थिति की गंभीरता को देखते हुये अब मुख्यमंत्री खुद योजना की कमान संभाले हुये हैं.

सीएम ने बुलाई आपात बैठक

भावांतर भुगतान योजना में गड़बड़ी को रोकने के लिये मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आपात बैठक बुलाई, जिसमें मुख्य सचिव बी.पी. ङ्क्षसह, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा व अन्य अधिकारी मौजूद थे.

बैठक में निर्णय लिया गया कि मुख्य सचिव योजना पर विशेष नजर रखेंगे व प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी मंडी की कमान संभालेंगे. पहली बार यह होगा कि मुख्य सचिव भी मंडियों का दौरा कर किसानों की बात सुनेंगे.

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