मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि आपदा प्रबंधन में ‘भावान्तर’ की ऐसी प्रणाली राज्य में लागू की है कि अब केन्द्र सरकार ने भी उस पर चलने का फैसला किया है.

अन्य राज्य भी ‘भावान्तर’ योजना को अपनाने जा रहे हैं. श्री चौहान हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री मोदी से मिले और उन्हें बताया कि अभी भावान्तर भुगतान योजना सिर्फ खरीफ फसलों पर ही लागू हो रही है और इसे रबी फसलों पर लागू करने की जरूरत है जिससे किसानों को अन्य फसलों का भी सही दाम दिया जा सके.

अभी तक केन्द्र सरकार कुछ खास 25 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर उस भाव पर फसलों को एक निश्चित कोटे में केन्द्र व राज्य सरकारें खरीदती हैं. यह मूल्य कहा तो ”न्यूनतम” जाता है लेकिन बाजार भाव से ऊंचा होता है और किसान उनकी उपज सरकारों को ही बेचते हैं.

लेकिन इसमें आलू, प्याज, टमाटर आदि सब्जीनुमा फसलें शामिल नहीं होतीं. मध्यप्रदेश में श्री चौहान ने राज्य सरकार को करोड़ों रुपयों का घाटा उठाकर इनके किसानों को राहत दी. प्याज इस हद तक खरीदी की कि वह खराब हो गयी और फेंकने में भी करोड़ों रुपये खर्च हो गये. लेकिन अब सभी फसलों पर श्री चौहान ने भावान्तर योजना लागू कर दी है.

किसान मंडी भाव और किसान भाव का अंतर किसानों को सरकार देती है. मध्यप्रदेश में इस भावान्तर योजना में 90 हजार किसानों को यह लाभ दिया गया.अब केन्द्र सरकार ने तय किया है कि वह आलू, प्याज और दूसरी सब्जियों को घाटे में बेचने वाले किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की तरह मार्केट सपोर्ट प्राइज देगी. किसानों को भावान्तर के रूप में मुआवजा मिलेगा.