गत अप्रैल माह में नेपाल में जबरदस्त भूकंपों का दौर आया था- जो कई दिनों तक चला और लगभग पूरा उत्तरी पहाड़ी नेपाल तबाह हो गया. इतिहास में दर्ज यह सबसे व्यापक क्षेत्र और कई दिनों तक चलने वाले भूकंप थे. भौगोलिक और भूगर्भीय विज्ञान के अनुसार एशियाई महाद्वीप की भू-गर्भीय प्लेट उत्तर की ओर सरक रही है. इससे हिमालय पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई हर साल एक सेंटीमीटर बढ़ रही है. नेपाल में भूकंप के समय भारत के भू-गर्भीय वैज्ञानिकों ने कहा था कि इन दिनों हिमालय क्षेत्र में जमीन के अंदर गतिविधियां बहुत सक्रिय है. नेपाल में कई दिनों तक भूकंप आते रहना पहली बार ही ऐसा हुआ था.

भूकंप कुछ सेकंडों या एक मिनिट के समय में चलते है. लेकिन नेपाल की तबाही में भूकंपों की एक श्रृंखला चल पड़ी थी, जिसने उसे तबाह कर दिया.

भौगोलिक दृष्टिï से प्रशांत महासागर के तटीय देशों का किनारा ज्वालामुखियों की श्रृंखला (रिंग आफ फायर) कहा जाता है. इस क्षेत्र में ज्वालामुखी व समुद्र के अंदर भूकंप से सुनामी लहरें आती है. इन दिनों वहां इंडोनेशिया और पश्चिम दक्षिण अमेरिकी देशों में ज्वालामुखी फटने की घटनाओं में वृद्धि हुई है.

हाल ही में जो भूकंप आया है वह अफगानिस्तान की हिन्दू कुश पर्वत श्रृंखला के जरम इलाके में 212 किलोमीटर जमीन के अंदर आया था. यह क्षेत्र राजधानी काबुल से 254 किलोमीटर दूर है. इसमें लगभग 300 लोग मारे गये हैं और 2000 से ज्यादा घायल हुए हैं. इसका प्रभाव पाकिस्तान में सबसे ज्यादा रहा. अफगानिस्तान में 100 मारे गये बाकी पाकिस्तान में मरे. इसका प्रभाव दक्षिण में पाकिस्तान व भारत में रहा वहीं उत्तर में कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान और तजिकिस्तान में था. अब यह भी प्रगट हो रहा है कि इसकी लहर की दिशा केंद्र बिंदु से दक्षिण की तरफ चली. भारत के जम्मू काश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तक इसका कम्पन पास और दूर के हिसाब से महसूस किया गया. नेपाल के भूकम्प भी भारत के उत्तरी व मध्यक्षेत्र के राज्यों में कम्पन महसूस किये गये थे. भारतीय वैज्ञानिक यह चेतावनी दे चुके हैं कि हिमालय क्षेत्र भूगर्भीय गतिविधियों में बहुत संवेदनशील स्थिति में चल रहा है. अफगान भूकम्प के 6 वृताकार बने थे. इसमें भूकम्प के बाद की वापसी लहर (रिटर्न शॉक) नहीं आया. जिन भूकम्पों में वापसी लहर आती है उनमें तबाही बहुत ज्यादा होती है. यह भूकम्प दोपहर 2.45 बजे तक आया और 7.7 की तीव्रता का रिक्टर स्केल पर दर्ज हुआ.

हिमालय क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत को ऐसी आपदाओं के लिए तैयार रहना चाहिए लेकिन इनका पूर्वानुमान न होने से कोई निश्चित कार्य की कार्यवाही नहीं हो सकती है. उत्तरी भारत के सभी राज्य, हिमालय क्षेत्रीय हैं, इन क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की व्यवस्था व संगठन की स्थापना सतर्क स्थिति में रहना चाहिए. मध्यप्रदेश में केवल जबलपुर में 1977 में भूकम्प आया था.

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