दृष्टिहीन उतरे तालाब में,मंत्री और कलेक्टर पहुंचे मनाने

नवभारत न्यूज भोपाल,

दृष्टिहीन बेरोजगार संघर्ष समिति द्वारा रोजगार, शिक्षा जैसी 23 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले एक सप्ताह से नीलम पार्क में विरोध प्रदर्शन जारी है. दृष्टिहीनों ने भूख हड़ताल में उतर कर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है. नि:शक्तजन बेरोज्गारी से परेशान हो कर सरकार पर आरोप लगाया है की खराब शिक्षा व्यवस्था के बावजूद अब दृष्टिहीन पढ़-लिखकर तैयार हुये तो अब रोजगार के लिये भटकना पड़ रहा है.

पिछले 8 दिनों से धरना दे रहे दिव्यांग 25 दिसंबर से भूख हड़ताल कर रहे थे, जो अब पानी में उतर कर जल सत्याग्रह करने पर मजबूर हो गये हैं. जिनसे मिलने आज सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग व कलेक्टर सुदाम खाडे अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर चर्चा करने पहुंचे और जल्द वाजिब सुविधायें प्रदान करने का आश्वासन दिया.

अपनी 23 सूत्रीय मांगों के साथ विरोध कर रहे दृष्टिïहीन बेरोजगार समिति के सदस्य सुरेश यादव का कहना है कि सरकार मात्र रोजगार की योजनायें बना रही है, लागू करने के बाद भी सुविधायें नहीं मिल पा रही हैं. दृष्टिïहीनों के लिये चलाये जा रहे विद्यालयों में शिक्षकों तथा कम्प्यूटर जैसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं का अभाव है.

भूख हड़ताल में बैठे सदस्य नीलेश वर्मा ने बताया कि मंत्री विश्वास सारंग, कलेक्टर सुदाम खाडे, एडीएम जी.पी. माली और एसडीएम मिनिलंद ढोके अधिकारियों के साथ पहुंचे थे तथा मंत्री सारंग ने कुछ मांगें मान भी लीं.

वहीं कलेक्टर खाडे से हमारी चर्चा हुई तथा शासन को भी मांगों से अवगत करा दिया है. शासन अपने स्तर पर मांगों पर निर्णय लेगी. इसके पहले दिन 25 दिसंबर को प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल चौधरी व कांग्रेस जिला अध्यक्ष पी.सी. शर्मा, पार्षद गुड्ïडू चौहान ने धरना स्थल पर पहुंचकर दिव्यांगों के साथ धरना दिया था.

उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ ने 28 नवंबर 2013 को विभिन्न विभागों के रिक्त पदों को 8 माह के अंदर पूर्ण रूप से भर्ती करने का म.प्र. शासन को आदेश दिया था, जिसके बावजूद अभी तक लगभग 8 हजार पद रिक्त हैं.

वहीं प्रदेश में दृष्टिहीनों को केवल 300 रुपये पेंशन दी जाती है. जहां अन्य कई प्रदेशों में 1500 रुपये तक दिये जा रहे हैं. साथ ही दृष्टिïहीन बेरोजगार संघ पूर्व में हुई कुछ पदों पर सीधी भर्ती में धांधली का आरोप लगाकर जांच की मांग भी सरकार के सामने रखी है.

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