20knwनवभारत टीम, शुक्रवार, 20 मार्च. देवपितृकार्य अमावस्या या भूतड़ी अमावस्या के इसी धार्मिक महत्व को देखते हुए ओंकारेश्वर एवं मोरटक्का, जबलपुर, होशंगाबाद, नेमावर में मां नर्मदा व उज्जैन की शिप्रा के घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने जहां डुबकिया लगाई वहीं, नदी किनारों पर तांत्रिक क्रियाएं भी खूब हुईं.

शनिवार से चैत्र नवरात्र आरम्भ होगी. पौरोणिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के एक दिन बाद हिन्दू धर्म का नया वर्ष शुरू होता है. इसी वजह से अमावस्या पर तांत्रिक क्रियाएं की जाती हैं. ऐसी मान्यता है की अमावस्या पर नर्मदा स्नान करने से बाहरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है. यही वजह है श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा.

श्रद्धालु परेशान हुए
परिक्रमा मार्ग मे संगम घाट जाने वाला मार्ग दो वर्ष पूर्व टूट गया था उसको नही बनाने से घाटो पर जाने वाले श्रद्धालुओं को काफ ी परेशानी हुई. इसी तरह भेरु घाट पर भी मार्ग उखडा हुआ है विद्युत पोल उखड गये थे उन्हें अभी तक नही लगाया गया है.

आस्था की डुबकी
नर्मदा पुराण एवं वेदों में वर्णन है कि नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. इसमें स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी धार्मिक मान्यता के चलते डुवकियों का सिलसिला दिन भर जारी रहा. रैवा मैया के जल में अमावस्या पर पर्व स्नान की परम्परा रही है. इसी परम्परा के निर्वहन के लिए देवास सहित उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, भोपाल, हरदा सहित अंचल से लाखो श्रद्धालु इस वर्ष भी स्नान कर पूण्य लाभ लेने के लिए पंहुचे. धारा जी में पुलिस के सख्त प्रतिबंध के कारण श्रद्धालु अधिक संख्या में स्नान नहीं कर पाए.

 

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