करीबियों से भी बना रखी है दूरी, लग रहीं हैं अटकलें

भोपाल,

मोदी मंत्रिमंडल की सदस्य और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती इन दिनों भोपाल में रह कर भी खामोश हैं. आमतौर पर जब वे भोपाल आती हैं तो मीडिया से भी जरूर मुखातिब होती हैं लेकिन इस बार उन्होंने अपने करीबियों से भी दूरी बना रखी है. उनके मौन को लेकर यह कयास लगने लगे हैं कि कहीं यह किसी तूफान के आने के पहले की शांति तो नहीं है.

उमा भारती के इस एकांतवास से यह भी अटकलें लगने लगी हैं कि क्या वह मध्य प्रदेश की राजनीति में वापसी के लिए संघ के जरिये बीजेपी पर दवाब बना रही हैं? या फिर वे राजनीति से संन्यास लेने की सोच रही हैं?

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में अपने मंत्रालय से उमा के नाखुश होने की भी चर्चाएं चल रही थीं. इसके बाद से स्वयं उमा ने मोदी सरकार में अपनी मौजूदगी नहीं के बराबर कर दी है. वह अपने मंत्रालय भी नहीं जा रही हैं. संसद के शीतकालीन सत्र में भी ज्यादा नहीं नजर आईं.

व्हिप जारी होने की वजह से एकाध दिन ही वह संसद में दिखीं. उनके निकटवर्ती सूत्रों का कहना है कि उन्होंने दिल्ली का सरकारी बंगला भी लगभग छोड़ ही दिया है. बस इसका अधिकृत ऐलान होना बाकी है.
जानकारों का कहना है कि भारती केंद्र को छोड़ मध्य प्रदेश की राजनीति में वापसी चाहती हैं.

इसके लिये संघ प्रमुख से गुहार कर रही हैं. लेकिन यह काम आसान नहीं है. उमा को बीजेपी की मध्य प्रदेश की राजनीति से किस तरह अपमानित करके निकाला गया है, यह सभी जानते हैं. बीजेपी की राजनीति में भी उनकी वापसी उत्तर प्रदेश के जरिए हुई है.

2012 में वह उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य बनी थीं. 2014 में झांसी से लोकसभा का चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंची थीं. मोदी ने उन्हें गंगा की सफाई का जिम्मा दिया था. लेकिन वह पूरी तरह असफल साबित हुईं. इसी वजह से उनका विभाग बदला गया. अपने कद में कटौती से उमा खुश नहीं हैं. लेकिन उन्हें यह भी मालूम है कि अगर उन्होंने मुंह खोला, तो मोदी बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक संघ उमा भारती का साथ दे रहा है. अब उमा चाहती हैं कि उन्हें मध्य प्रदेश में काम करने दिया जाए. इसलिये वह संघ प्रमुख से मदद मांग रही हैं. उमा के निकटवर्ती सूत्रों का यह भी कहना है कि अगर उमा की बात नहीं मानी गई, तो वह मंत्री पद छोड़कर केदारनाथ चली जाएंगी. चुनावी साल में संघ ऐसा कोई पंगा नहीं चाहता. देखना यह है कि भागवत क्या रास्ता निकालते हैं?

भागवत से मुलाकात करने विदिशा जा सकती हैं

बताया जाता है कि उमा मंगलवार को नागपुर जाकर संघ प्रमुख मोहन भागवतत से मिली थीं. उसी दिन वह भोपाल आ गई थीं. समझा जा रहा है कि उमा संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने के लिए ही भोपाल में रुकी हैं.

भागवत इस समय मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं. वह बुधवार की शाम भोपाल आए थे. गुरुवार को सुबह आरएसएस प्रमुख विदिशा चले गए. अब तीन दिन वहीं रहेंगे. इस दौरान उमा विदिशा जाकर भागवत से मुलाकात कर सकती हैं.

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