bpl1भोपाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहाँ सुख, स्नेह, भाईचारा और सदभावना नहीं रहे , ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता.उन्होंने भौतिक प्रगति के मायने, दिशा और दशा पर विचार की आवश्यकता बताई है.
चौहान ने यह विचार शांति, सदभाव एवं स्वच्छ भारत के लिये प्रतिबद्ध आशा यात्रा के भोपाल आगमन पर मुख्यमंत्री निवास में गुरुश्री एम. के आध्यात्मिक सत्संग में व्यक्त किए.मुख्यमंत्री ने कहा कि भौतिकता की गलाकाट प्रतियोगिता का अंत क्या होगा. इसका उत्तर भारतीय संस्कृति में ही मिल सकता है, जहाँ धर्म का मतलब सबका सुख है.दूसरों की भलाई को ही सबसे बड़ा धर्म माना गया है.

दूसरों को परेशान करने को ही सबसे बड़ा पाप बताया गया है.आध्यात्मिक संध्या में सुश्री कलापनि ने मालवा अंचल के भक्त कवि गोपीचंद, नाथ संत और कबीर दास के भजनों की प्रस्तुति दी.प्रारंभ से अभी तक की आशा यात्रा पर आधारित वृत्त चित्र भी दिखाया गया। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, मुख्यमंत्री की धर्म-पत्नी श्रीमती साधना सिंह, वाणिज्य, उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया, राजस्व मंत्री रामपाल सिंह एवं गणमान्य नागरिक तथा आशा यात्रा के कोरग्रुप के सदस्य उपस्थित थे.