bpl1भोपाल,  वरिष्ठ दलित आईएएस अधिकारी रमेश थेटे राज्य सरकार की कथित प्रताडऩा से बेहद दुखी हैं. उनका यह दर्द सोमवार को दलित-आदिवासी फोरम में बाहर आ गया और वह फूटफूट कर रोने लगे.

दलित-आदिवासी फोरम के बैनर तले आईएएस अफसर शशि कर्णावत (निलंबित) और रमेश थेटे ने राज्य सरकार द्वारा मिल रही कथित प्रताडऩा के विरोध में सोमवार को अंाबेडकर पार्क में दिन भर का धरना दिया. इस मौके पर थेटे ने बताया कि उन्हें लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है. उनके खिलाफ नौ से अधिक मामले दर्ज किए गए, लोकायुक्त उनके पीछे पड़े हुए हैं, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने सभी मामलों में उनके पक्ष में फैसला दिया, उसके बाद उन्हें पदोन्नति मिली.

वह इस वक्त बाल संरक्षण आयोग के सचिव नियुक्त किए गए हैं. थेटे ने बताया कि सरकार की प्रताडऩा के कारण ही उनके बच्चों के चेहरे की खुशी और पत्नी का सौंदर्य खत्म गया है. उन्हें प्रताडि़त सिर्फ इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि वह दलित वर्ग से हैं. इधर, कर्णावत ने कहा कि उन्हें जिस मामले में निलंबित किया गया है, ठीक वैसा ही मामला एक अन्य अधिकारी के खिलाफ भी था, लेकिन सरकार ने उन्हें संरक्षण दिया.

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