प्रीति रघुवंशी आत्महत्या

विशेष प्रतिनिधि भोपाल,

मध्यप्रदेश की एक बिटिया प्रीति रघुवंशी की आत्महत्या से उपजी कठिन परिस्थितियों से निपटने के दौरान सरकार बैकफुट पर तो आई लेकिन जनता का आक्रोश अभी ठण्डा नहीं हुआ है.

आपदा से निपटने के लिए जो रणनीति बनाई गई थी उसमें बचाव के रास्ते निकाले गए थे कि मंत्री पुत्र गिरिजेश सीधे फंसने से बचे और रामपाल को मंत्री पद भी नहीं छोडऩा पड़े, लेकिन हालात बता रहे हैं कि इन प्रयासों से रामपाल, गिरिजेश और इनको बचाने में लगे सिस्टम के प्रति लोगों में गुस्सा कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है.

प्रीति रघुवंशी की मौत के तीन दिन बाद गिरिजेश अपनी मृत विवाहिता पत्नी के अस्थि विसर्जन में शामिल हुआ. उसके साथ बाउंसरों की फौज थी.

दरअसल अस्थि विसर्जन में गिरिजेश का एक पति के रूप में शामिल होकर अपराधबोध की भावना और प्रायश्चित का प्रदर्शन करना, रामपाल का प्रीति को बहू मानना- ये ऐसे बिंदु थे जिनसे यह प्रतीत हो रहा था कि इस रवैये से मध्यप्रदेश की जनता का गुस्सा कम हो जाएगा और रामपाल का मंत्री पद भी बच जाएगा.

ऐसा करके गिरिजेश और रामपाल ही नहीं अपितु एक तरह से मध्यप्रदेश सरकार बैकफुट पर आ गई थी क्योंकि रामपाल मध्यप्रदेश की सरकार के एक चेहरे हैं और बहू की आत्महत्या पर उन पर और उनके परिवार पर तमाम आरोप लग रहे हैं.

इधर, प्रीति के घरवाले तमाम दबाव के आगे डगमगाए नहीं और वे सतत कार्रवाई की मांग करते रहे. सवाल यह उठता है कि मृत बेटी के पिता की शिकायत पर कार्रवाई करने से गिरिजेश क्या यूं बच सकता है कि वह अपनी ऐसी पत्नी के अस्थि विसर्जन में शामिल हो रहा था, जिसके होते हुए वह सगाई की रस्म करने गया था और अंतत: प्रीति को आत्महत्या करना पड़ी? क्या रामपाल का मंत्री पद तब भी बहाल रखा जा सकता है कि प्रीति के परिजन लगातार यह शिकायत कर रहे हैं कि मंत्री दबाव में पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है और हीले-हवाले किए जा रहे हैं? मंत्री तीन दिन उहापोह में रहते हैं, पहले मना करते हैं, प्रीति उनकी बहू नहीं थी और बाद में रणनीति बनाकर उसे बहू मानते हैं.

जनता सरकार और मंत्री से यही सवाल कर रही है- मध्यप्रदेश की एक बेटी की मौत पर मंत्री पुत्र को बचाने और मंत्री पद को बचाने के लिए ये सियासी ड्रामे क्या उचित है?

न्याय नहीं मिला तो प्रीति जैसा हश्र हमारा: पिता

प्रीति रघुवंशी आत्महत्या मामले में पुलिस ने प्रीति के पिता चंदन सिंह रघुवंशी के ढाई घंटे तक बयान दर्ज किए. वहीं चंदन सिंह का आरोप है कि लोनिवि मंत्री रामपाल सिंह और उनके बेटे गिरजेश सिंह राजपूत के बारे में नहीं पूछा गया.

उन्होंने लगाए गए आरोपों को दोहराते हुए कहा कि मंत्री के लोग हमसे कहते थे कि पैसा ले लो और बेटी की कहीं और शादी करा दो. वह कहते थे कि सब भूल जाओ और तुम्हें इतना पैसा देंगे, जितना तुमने कभी जिंदगी में नहीं देखा होगा. चंदन सिंह रघुवंशी ने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो हमारा भी वही हश्र होगा, जो हमारी बेटी का हुआ है.

चंदन रघुवंशी की बयान के दौरान गुरूवार को तबियत बिगड़ गई थी, इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस मेरी नौकरी, मेरे ट्रांसफर और पोस्टिंग के सवाल पूछती रही, साथ ही कितने भाई हैं, रिश्तेदार कौन-कौन से हैं, ये सभी सवाल पूछे गए, लेकिन मंत्री और बेटी प्रीति की सुसाइड से जुड़ा एक भी सवाल नहीं पूछा गया, पुलिस ने बयान के नाम पर सिर्फ मुददे से अलग हमें घुमाया.

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