केरल के कोल्लम में मंदिर अग्निकांड की दुर्घटना बहुत बड़े स्तर की हो गयी. प्रारंभ में ही 110 लोग मारे गये और 400 गंभीर रूप से जलने से घायल हुए हैं. इसलिए मृतों की संख्या भी बढ़ते हुए काफी होने जा रही है. हाल ही में मध्यप्रदेश के पेटलावद में भी अवैध रूप से बीच बस्ती में रखे गये बारूद के स्टाक में आग लग जाने से 85 लोग मारे गये और लगभग 200 जलने से घायल हुए और कई मकान विस्फोट में उड़ गये.

जब ऐसी कोई घटना हो जाती है तो फिर इन बातों का सिलसिला चल पड़ता है कि यह होना था, यह करना था, यहां शासन की लापरवाही हुई है. लेकिन ये दोनों दुर्घटनाएं ऐसी थीं जहां वह व्यवस्था या आयोजन लगातार कई वर्षों से होता आ रहा था और किसी एक दिन बड़ी दुर्घटना हो गयी. यहां वजह इतनी साफ है कि जांच एक सरकारी प्रक्रिया हो जाती है.

पुत्तिंगल मंदिर में हर हिन्दू नव वर्ष गुड़ीपड़वा पर उस दिन विशेष पूजा अर्जना व समारोह में भारी भीड़ जुड़ती है. उस अवसर पर परंपरा के तौर पर दो बड़े आतिशबाजों का मुकाबला आयोजित किया जाता है. उसका प्रचार प्रसार व निमंत्रण में भी उल्लेख रहता है. नववर्ष की पूजा अर्चना के बाद लोग इस आतिशबाजी के मुकाबले को देखने के लिये भक्तजन इकट्ठा हो जाते हैं.

दुर्घटना के विवरण में यह भी आ गया है कि दोनों मुकाबले के आतिशबाज अपना-अपना स्टाक साथ रखे थे, उनकी आतिशबाजी के करतब दिखाने का सिलसिला चल ही रहा था कि एक पटाखा विस्फोट उड़कर पास रखी हुई आतिशबाजी के ढेर पर जा गिरा और पलक झपकते पूरे स्टाक में ऐसा भयंकर विस्फोट हुआ कि पूरा मंदिर उड़ गया और भक्त दर्शक उसकी चपेट में आ गये. हो सकता है इनमें वे आतिशबाज भी मारे गये हों. मध्यप्रदेश की दुर्घटना में भी बारुदी स्टाक का मालिक भी मारा गया था.

मंदिर दुर्घटना में यही हो गया लगता है. क्रेकर फैक्ट्री के लोगों की गिरफ्तारियां भो हो गयी हैं. बचाव कार्य यकीनन बहुत ही तुरन्त और पूरी तैयारी से चल रहा है. राज्य व जिला प्रशासन, सेना के तीनों अंग बड़ी मुस्तैदी से फौरन जुट गये हैं.
वायुसेना के हेलीकॉप्टर व लाइट विमान, नौसेना के जहाज, सेना की टुकडिय़ां फौरन दुर्घटना स्थल पर पहुंच गये. घायलों को पूरे समुचित इलाज के लिए बड़े अस्पताल में भेजा जा रहा है. राज्य के मुख्यमंत्री श्री चांडी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी स्थल पर पहुंच गये.

केरल के और सभी बड़े मंदिरों में आतिशबाजी के ऐसे प्रतियोगी मुकाबले लम्बे समय से हर साल होते ही चले आ रहे हैं. आतिशबाजों ने अपने स्टाक की पर्याप्त सुरक्षा व निगरानी नहीं रखी और यह त्रासदी हो गयी.

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