sankrantiचित्रकूट,  चित्रकूट के भरतकूप (कुंआ) पर आज मकर संक्रांति के अवसर पर तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान कर खिचड़ी आदि का दान किया .पौराणिक मान्यता है कि आज के दिन इस कुँए में स्नान करने से समस्त तीर्थों में स्नान करने का लाभ मिलता है.

राम चरित मानस के अनुसार जब भगवान राम और सीता को 14 वर्ष का वनवास हुआ था तब भरत जी उनको वापस लेने के लिए चित्रकूट आए थे . यहीं पर उनका राजतिलक करने के उद्देश्य से वह समस्त तीर्थों का जल स्वर्ण कलश में लेकर के आए थे. लेकिन श्रीराम ने वनवास काल पूरा किये बिना जाने से इंकार कर दिया तो वापस लौटते समय अत्रि मुनि के कहने पर सहोदर भरत ने इस पवित्र जल को एक कुएं में डाल दिया जिससे इस कुँए का नाम भरत कूप पड़ा.

मान्यताओं के अनुसार खिचड़ी के दिन इस कुँए में समुद्र की तरह लहरें उठती हैं. इस कुएं में स्नान करने से संपूर्ण तीर्थों में स्नान करने का लाभ प्राप्त होता है. पूरे देश में भरतकूप ही एक मात्र ऐसा कुंआ है जहां पूरे देश में सबसे अधिक लोग इस दिन यहाँ स्नान करते हैं.

Related Posts: