मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा मध्यप्रदेश में असंगठित मजदूर कल्याण योजना प्रारंभ कर दी गयी है और एक अप्रैल से 14 अप्रैल तक इसके तहत श्रमिकों का पंजीयन कराया जा रहा है.

यूपीए शासनकाल में केंद्रीय सरकार द्वारा दिये जा रहे फंड से पूरे भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों के लिये मनरेगा रोजगार योजना प्रारंभ की गयी थी. इसे पूरे विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण विकास योजना माना गया.

गांवों में मनरेगा के बराबर मजदूरी देने के लिये लोग विवश हो गये. बड़े किसानों को यह शिकायतें हो गयीं कि मनरेगा की वजह से उन्हें खेती के काम के मजदूर नहीं मिल रहे हैं. प्रारंभ में फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी भुगतान या कम भुगतान की खबरें आयी और उनका निदान पोस्ट आफिस या बैंकों से भुगतान किया गया है.

लेकिन अब मनरेगा चर्चा से बाहर होती जा रही है. ऐसा लगने लगा है कि यह योजना खामोशी से ऐसी खत्म हो जायेगी कि किसी को यह पता भी नहीं चलेगा कि मनरेगा कब खत्म हो गयी.

राज्य सरकार ने मजदूर कल्याण योजना के तहत मजदूरों को सौगात व विकास का अंबार लगा दिया. यह लगातार चलता रहे. मनरेगा की तरह खामोशी से दब न जाए.

Related Posts: