मध्यप्रदेश का बासमती चावल होते हुए भी बासमती नहीं माना गया, क्योंकि अभी उसे इसके होने का ‘टैग’ नहीं मिला है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान इसलिए लगातार प्रयासशील रहे हैं और इन ही उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय सरकार के मंत्रियों वाणिज्य मंत्री श्री सुरेश प्रभु, केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह और मध्यप्रदेश की ही विदिशा से लोकसभा सांसद विदश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज से मिलकर इस बारे में लाबिंग कर रहे हैं.

श्री चौहान इस तथ्य को जोरदार ढंग से पेश कर रहे हैं कि मध्यप्रदेश के 13 जिले में 105 साल से बासमती चावल की खेती हो रही है और राज्य के लगभग एक लाख किसान बासमती धान की खेती करते है. राज्य से तीन हजार करोड़ रुपयों का बासमती निर्यात होता है. इनकी गुणवत्ता सभी स्टेंडर्ड पर मान्य पायी गई है. टैग न मिलने के कारण मध्यप्रदेश के किसानों को सही मूल्य बाजार में नहीं मिल पायेगा.

बासमती पैदा करने वाले जिलों में एग्रो क्लाई मेटिक कंडीशन भी इसकी उपज में सहायक है. राज्य के बासमती को केवल बासमती है या नहीं इसी कृषि ज्ञान से देखा जाना चाहिए. अन्य शर्तें अकारण व कृत्रिम लगती हैं.

Related Posts: