mahakalउज्जैन. श्रावण के पहले सोमवार पर बाबा महाकाल गाजे-बाजे के साथ अपनी प्रजा को दर्शन देने के लिए निकले. राजाधिराज ने मनमहेश के रूप में दर्शन देकर भक्तों को अभिभूत कर दिया.

जय महाकाल… जय महाकाल… की अनुगूंज, ढमरूओं का निनाद और झांझ-मजीरों की आवाज के बीच बाबा महाकाल पालकी में सवार होकर अपने प्रजाजनों का हाल जानने के लिए निकले.