नयी दिल्ली,

अवैध खनन रोकने के तमाम उपायों के बावजूद वर्ष 2014 से 2017 के दौरान मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में प्रमुख खनिजों के अवैध खनन के मामलों में भारी वृद्धि हुई है।

केंद्रीय खान मंत्रालय की ओर से मुहैया कराये गये आंकड़ों के अनुसार लौह अयस्क, कोयला और लिग्नाइट जैसे प्रमुख खनिजों से सम्पन्न देश के 12 राज्यों में से मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में इस दौरान अवैध खनन के मामलों में क्रमश: 106, 52.8 और 33.6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।

मध्य प्रदेश में 2013-14 में अवैध खनन के 6,725 मामले दर्ज किये गये थे, जो वर्ष 2015-16 में दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 13,880 हो गये। गुजरात में इन मामलों की संख्या 2014 के 5,447 के मुकाबले 2017 में बढ़कर 8,325 हो गयी जबकि राजस्थान में इस दौरान ये मामले 2,953 से बढ़कर 3,661 हो गये।

इस दौरान तमिलनाडु, झारखंड और ओडिशा में अवैध खनन के मामलों में कमी दर्ज की गयी है। तमिलनाडु में 2014 में अवैध खनन के 1,078 मामले दर्ज किये गये थे जो 2017 में काफी कम होकर 56 रह गये और झारखंड में इस अवधि में इन मामलों की संख्या 901 से घटकर 694 हो गयी जबकि ओडिशा में ये मामले 76 से 45 पर आ गये।

अप्रैल 2013 से सितंबर 2017 तक इन मामलों की सबसे ज्यादा 10,734 प्राथमिकी तमिलनाडु में दर्ज की गयी। मध्य प्रदेश में 516, गुजरात में 382 और राजस्थान में 2,536 प्राथमिकी दर्ज की गयी। इस दौरान आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना समेत कुल 12 राज्यों में अवैध खनन के मामलों में 2,117.73 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूल किया।

मंत्रालय ने अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए तिहरी रणनीति बनायी है। इसके लिए 1957 के खान और खनिज (विकास एवं नियमन) कानून की धारा 23सी के तहत राज्य सरकारों को इन पर रोक लगाने के नियम बनाने का अधिकार देने के प्रावधान बनाने का अधिकार देने के अलावा जिला स्तर पर कार्यबल का गठन करने तथा हर तिमाही इन मामलों की जानकारी केंद्र को देने को कहा गया है। अब तक 20 राज्यों ने ये नियम बनाये हैं तथा 22 ने कार्यबल का गठन किया है।

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