राज्य के वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया और उनकी पत्नी और भाजपा नेता श्रीमती सुधा मलैया चलती ट्रेन में मथुरा-दिल्ली के बीच कोसीकलां के नजदीक ट्रेन डकैतों द्वारा लूट लिये गये. कोई खास बात नहीं है एक अर्से से भारत भर में और भोपाल-दिल्ली रेल सेक्शन पर ट्रेनों में लोग लूटे ही जा रहे हैं. इस बार राज्य के वित्त मंत्री मलैया दम्पति भी लूटे गये. इसमें वे भी अकेले नहीं थे. उसी कोच में उनसे पहले अन्य कई मुसाफिर भी लूटे गये थे. सबसे अंत में मलैया दम्पति का नंबर आया था, उन्हें लूटा और उतर गये.

आगरा के रेल सुपरिंटेंडेंट पुलिस श्री गोपेश नाथ खन्ना ने कहा है कि ट्रेन लुटेरे कोच अटैंडेंट की साजिश व सहयोग से मथुरा में चढ़े होंगे. बीना के पास आगासोद में एक महिला रुचि… त्रिपाठी को ट्रेन लुटेरों ने मुकाबला करने पर नीचे फेंक दिया. उसी जांच में यह जाहिर हो गया कि ट्रेनों में जो ऐसी चोरी-डकैतियां हो रही हैं उन्हें ट्रेन के टी.टी., रेलवे पुलिस स्टेशनों का रेलवे स्टाफ सब मिलजुल कर चला रहे हैं. अब रेल में अपराध रेलवे स्टाफ का ही धंधा बन चुका है. कुछ समय पूर्व भोपाल स्टेशन से एक सुपर फास्ट ट्रेन की जनरल बोगी में सशस्त्र लुटेरे चले थे. उन्हें रेलवे के ही स्टाफ से यह जानकारी दे दी गयी थी कि उस दिन उस कोच में पुलिस के नियुक्त चारों जवान नहीं रहेंगे और लुटेरों ने ट्रेन के चलते सभी को लूट लिया और एक महिला को बेइज्जत कर दिया जब रेलवे स्टाफ ही यह सब नियमित रूप से करवा रहा है तब इस बात की अब कोई संभावना तक नहीं बची कि रेलों में कोई भी सुरक्षित है. मलैया के इस मामले में भी ट्रेन में चल रही आर.पी.एफ. की पुलिस उस वक्त वहां पहुंची जब वे लूटे जा चुके थे. ट्रेेनों में चोरी डकैती करवाना रेलवे स्टाफ का ही धंधा बन चुका है. इसमें पुलिस भी उन्हीं के साथ नजर आ रही है. अब ट्रेनों में अपराध रोज की वारदात हो चुकी हैं.

रेल यात्रियों की दिन में भी खैर-खैरियत नहीं है. जबरिया चन्दा उघायी की गैंग चला करती है. हिजड़ों ने इसे अपना दबंगी का धन्धा बना लिया है. वे ही यह तय करते हैं कि मुसाफिर उन्हें कितना दें. उज्जैन के एक यात्री को अहमदाबाद के पास ट्रेन में एक हिजड़े ने इसलिए उसकी छुरा मारकर हत्या कर दी कि उसने उसे 150 रुपये देने से इंकार कर दिया था. यह एक साधारण यात्री का मामला था- आया गया हो गया. इस बार मंत्री मलैया दम्पति लुटे हैंस कुछ दिनों तक यह चर्चा में रहेगा. रेल यात्री की असुरक्षा में कोई कमी होती नजर नहीं आ रही है. रेलवे स्टाफ यात्रियों को परेशान करने पर उतारू हो गया है. जब ट्रेन स्टेशनों पर पहुंचती है तो प्लेटफार्म पर सभी पीने के पानी के वाटर टैंक खाली कर दिये जाते हैं. ट्रेनों में मांगने वाले बच्चे यात्रियों के पीछे पड़कर उनसे पानी की प्लास्टिक बोतलें जबरिया ले जाते हैं. उसमें पानी भरकर उसे वे दूसरे मुसाफिरों को बेचते हैं. कई बड़े स्टेशनों में रेलवे ने शहरों में चल रहे बड़े स्टोरों के सामान माल ढोने के लिये हैंड ट्राली की व्यवस्था की है. रेलवे के कुली उन्हें तोड़ देते हैं या ट्रेन के समय प्लेटफार्म से हटा देते हैं. यह कहा जा सकता है कि रेलवे स्टाफ यात्रियों की मजबूरी का पूरा फायदा उन्हें परेशान व शोषण कर उठा रहा है. इस समय रेल यात्रा सबसे असुरक्षित खतरनाक है.

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