केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने संसद में सूचित किया है कि मर्सत आलम के मामले में काश्मीर सरकार व मुख्यमंत्री मोहम्मद मुफ्ती को केन्द्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से निर्देशिका (एडवायजरी) जारी कर दी है इसका परिपालन अनिवार्य होता है अन्यथा केन्द्र सरकार काश्मीर सरकार को बर्खास्त करने का निर्णय भी ले
सकती है.

काश्मीर सरकार को निर्देश दिया गया है कि मर्सत आलम और उसके सहयोगियों पर कड़ी नजर रखी जाए. उसके विरुद्ध जो 27 अपराधिक मुकदमे कायम हो चुके हैं उन पर अदालतों में शीघ्र सुनवाई का निवेदन किया जाए.

मर्सत की रिहाई के समय मुकदमों में तो वह जमानत पा चुका था लेकिन उसे ‘पत्थरÓ अभियान को चलाने के अभियोग और हिंसा फैलाने के आरोप में पिछले साढ़े चार सालों से पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत जेल में रखा गया था.

केन्द्र सरकार ने एडवाजयरी जारी कर दी है और मुफ्ती इसे लागू होना भी दर्शा देगा. लेकिन वह मुख्यमंत्री पद का इस्तेमाल दूसरे अन्य तरीकों से पाकिस्तान परस्त अलगाववादियों को बढ़ावा देता रहेगा. मुफ्ती मुस्लिम साम्प्रदायिकता व भारत विरोधी है और इस पर विश्वास करना आत्मघाती हो सकता है. राजनीति में ऐसे लोगों को ‘आस्तीन के सांपÓ कहा जाता है. जम्मू काश्मीर के एक भूतपूर्व गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल एस.के. सिन्हा, जिनकी गवर्नरी में मुफ्ती मुख्यमंत्री रहे थे, कह चुके हैं कि यह व्यक्ति साम्प्रदायिक और भारत विरोधी है इस पर कभी विश्वास नहीं किया जाना चाहिए. भारत सरकार ने एडवायजरी में यह तो कहा कि जम्मू काश्मीर की सरकार मर्सत आलम पर कड़ी नजर (सरवीलेन्स) रखे और भारत सरकार को उससे अवगत कराती रहे. लेकिन जीवन में ऐसे अवसर भी आते हैं जब हर किसी को आत्मचिंतन और आत्मविवेचन के साथ आत्म आलोचना भी करनी पड़ती है. यही परिमार्जन की स्थिति होती है. केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह व केन्द्रीय गृह मंत्रालय, इन्टेलीजेन्स ब्यूरो, मिलिट्री इन्टेलीजेन्स को भी अपने खुद के लिये भी एडवायजरी लागू कर लेना चाहिए कि मुफ्ती भरोसे का राजनैतिक व्यक्ति नहीं है और इस पर विश्वास नहीं करना चाहिए. जब श्रीनगर में अमरनाथ यात्रा के लिये कार्यालय व ट्रान्जिट हाउस के लिये जमीन दी गयी तब इसी मुफ्ती परिवार के कारण मुस्लिम साम्प्रदायिकता काश्मीर घाटी में उग्र उन्माद आ गया था. पूरे घाटी क्षेत्र में ‘बन्दÓ रखा गया. इसकी विपरीत प्रतिक्रिया जम्मू में हिन्दू उग्रवाद में हुई और घाटी की आर्थिक नाकाबन्दी हो गयी. जवाबी कार्यवाही ‘जम्मूÓ में अनिश्चितकाल के लिए ‘बन्दÓ रखा गया.

इस समय इसी मुफ्ती परिवार के कारण हिन्दू-मुस्लिम कटुता व टकराव चरम सीमा पर आ गया था. उसी तरह मर्सत आलम ने 2010 में काश्मीर घाटी में भारत विरोधी हिंसा का दौर चला दिया था. भारतीय सैनिकों पर हर जगह पत्थर मारने का अभियान चलाया गया था.

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