जिस तरह उपभोक्ता महंगाई बढ़ती जा रही है उस पर शायराना अंदाज में यही कहा जा सकता है कि इस महंगाई का आलम क्या होगा आगे और यह क्या होगा. यू.पी.ए. सरकार काल की महंगाई को कम करने के नाम पर भाजपा श्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत कर सत्ता में तो आ गयी लेकिन अपने सभी वायदों से मुकर गयी. डीजल की कीमतें 19 बार बढ़ाकर माल यातायात का भाड़ा बढ़ाते रहने से वस्तुओं के मूल्य भी बढ़ते जा रहे है. सरकारें अपने बड़े कार्यक्रम बजट में पेश करती है और उनके लिये धन का प्रावधान किया जाता है.

लेकिन मोदी सरकार स्वच्छ भारत अभियान, किसान कल्याण अभियान सर्विस टैक्स के छल कपट से उपभोक्ताओं से वसूली या उघाई के सिद्धांत पर कर रही है. सर्विस टैक्स अब छलावा टैक्स बना दिया गया है. घोषणा की जाती है कि इसे आधा प्रतिशत बढ़ाया गया है. लेकिन यह हर उपभोक्ता वस्तु व सेवा पर लगता है तो उसका कुल भार 20 प्रतिशत बढ़ जाता है.

स्वच्छ भारत और किसान कल्याण व शिक्षा अभियान के नाम पर यह तीन बार बढ़ाया जा चुका है और कीमतों में 60 प्रतिशत की वृद्धि आ चुकी है. माल भाड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. अरहर दाल के बारे में घोषणाएं हो गयीं कि आयात हो गया है. राज्यों को भेजा जा रहा है. और इसे 60 रुपये किलो पर राज्यों को दिया जा रहा है और राशन की दुकानों से 120 रुपये तक उपभोक्ताओं को दिया जायेगा. अरहर तो आयी नहीं- उड़द के दाम भी 200 रुपये किलो पर पहुंच गये. चना दाल भी दिनों के हिसाब से बढ़ती हुई 90 रुपयेे किलो तक पहुंच गयी है. खाद्य व्यापार व उद्योग में बेसन की खपत काफी होती है और चने की पैदावार में कमी आई है.

इससे अभी से यह बाजार गति में तेजी से भाव बढऩे की वस्तु बन गया है. इसके बढऩे की चाल में यह एक दिन में 8 रुपये किलो और एक माह में चना 1200 प्रति क्विटंल हो गया. सरकारी क्षेत्र की कम्पनी कोल इंडिया ने क्वालिटी के हिसाब से कोयला के दाम 13 से लेकर 19 प्रतिशत बढ़ा दिये हैं. ताप बिजली की उत्पादन लागत भी उसी अनुपात में बढ़ जायेगी. सभी उद्योगों में उत्पादन की कीमत भी बढ़ते जा रही है. मोदी सरकार केें दो साल भाव बढऩे में ही चले गये और यही रवैया आगे भी रहने के आसार बन गये हैं.

बिजली की दरों में 10 प्रतिशत तक वृद्धि हुई. वर्ष 2015 में अल्प वर्षा और सूखे की हालत के कारण भारत इस वर्ष 5 मिलियन टन गेहूं का आयात करने जा रहा है. वर्ष 2016-17 में गेहूं का उत्पादन 85 मिलीयन टन रहा है जो पिछले साल की तुलना में 2.3 प्रतिशत कम है. गेहूं के आयात पर 25 प्रतिशत आयात पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क भी लगाया जा रहा है. दालों के भावों में बढ़त 90 से 112 प्रतिशत हो गई है.

बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं खासकर खाद्यान्न में रोकथाम के लिए कोई कार्य नजर नहीं आ रहे हैं. टैक्स व भाव लगातार बढ़ रहे हैं.

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