इस समय देश की यह हालत है कि रिटेल महंगाई उच्च स्तर पर 4.88 प्रतिशत हो गयी और विकास दरों में गिरावट आयी है. रिजर्व बैंक ने महंगाई का स्तर 4 प्रतिशत रखा था, यह उससे भी ऊपर निकल गयी.
औद्योगिक उत्पाद में मेन्यूफेक्चरिंग घटकर 2.5 प्रतिशत और माईनिंग में गिरकर 0.2 प्रतिशत रह गयी. यह न्यूनतम स्तर है.

उपभोक्ता क्षेत्र में गत माह नवंबर में सब्जियों के भाव लगभग 23 प्रतिशत बढ़ गये, जबकि इससे एक माह पहले अक्टूबर में यह लगभग 8 प्रतिशत थी. पूरे खाद्यान्न क्षेत्र में नवंबर में महंगाई 4.42 बढ़ी जबकि अक्टूबर में यह 1.9 प्रतिशत थी.

जी.एस.टी. की वजह से भी उपभोक्ताओं को परेशानी आ रही है. लगभघ सभी वस्तुओं पर अधिकतम रिटेल मूल्य (एमआरपी) छपा रहता है. लेकिन जीएसटी के बाद कई दुकानदार ग्राहकों से एम.आर.पी. के ऊपर जी.एस.टी. मांग रहे हैं.

इस गड़बड़ी को देखते हुए केन्द्रीय सरकार ने स्पष्टïीकरण दिया है कि एम.आर.पी. में जी.एस.टी. शामिल रहता है और उसके ऊपर जी.एस.टी.लेना गैर कानूनी है. जी.एस.टी. की वजह से अभी कई तरह की परेशानी दुकानदारों व ग्राहकों को आ रही है.

इनमें स्थायित्व आने मेंकाफी देर लग रही है. जी.एस.टी. की केन्द्रीय परिषद तीसरे महीने होती है और इस समयावधि में अधिकारी और व्यापारी कई तरह के अर्थ निकाल रहे हैं.एशियन डेवलपमेंट बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2017 में भारत की विकास दर घटकर 6.7 प्रतिशत रह जायेगी और 2018 में 7.3 प्रतिशत हो जायेगी.

भावों में तेजी की एक वजह विश्व के तेल बाजार में क्रूड आइल की कीमतें बढऩा भी है. पिछले ढाई साल में क्रूड की कीमतें बढ़कर 65.70 डालर पहुंच गयी है. पिछले 6 महीनों में क्रूड की कीमतों में 47 प्रतिशत की तेजी आयी है.

भारतीय बाजारों व उद्योगों में अभी भी इस बात का प्रभाव देखा जा रहा है कि देश में मुद्रा चलन में अभी भी उतनी करेंसी नहीं है जो विमोद्रीकरण से पहले औसत रूप से रहा करती थी. बाजार में अभी भी हजार रुपये का नोट नये रूप में नहीं आया है.

सरकार की ‘कैशलैस’ अर्थव्यवस्था की मुहिम को सबसे बड़ा झटका इससे लगा है कि बैंकों के ए.टी.एम. धोखाधड़ी के अपराध और कार्ड मनी में साइबर क्राइम बढ़ते ही जा रहे हैं. किसी दूर के शहर में उनके कार्ड से रुपया निकल जाता है.

बैंक आमतौर पर ऐसे पीडि़त लोगों की मदद के बजाय केवल उन्हें सावधान रहने का उपदेश और नसीहत देते है. ए.टी.एम. रुपया डालने वाली कंपनियों के कर्मचारी ही रुपयों की हेराफेरी कर रहे हैं.केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक को मुद्रा बाजार में औसत करेन्सी उतारना चाहिए.

बैंकों में ग्राहकों के साथ साइबर क्राइम से नुकसान होने पर उन्हें तुरन्त राहत की योजना भी बनानी चाहिए.मुद्रा की कमी से थोक रिटेल बाजार व उद्योग-व्यापार जगत में अभी भी तनाव की स्थिति है.

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