06feb2नई दिल्ली,  जम्मू-कश्मीर की सियासत में अचानक से गरमी आ गई है. जपा-पीडीपी के बीच राजनीतिक तलाक के कुबूलनामा के संकेत के बाद से ही नए राजनीतिक गठजोड़ की सुगबुगाहट आरंभ हो गई है. पीडीपी चीफ महबूबा पिछले एक महीने से सरकार बनाने पर चल रही रस्साकशी के बीच कुछ ऐसे संकेत किए है.

सूत्रों की मानें तो जल्द ही कांग्रेस के समर्थन से पीडीपी सरकार बनाएगी. राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो मुफ्ती मुहम्मद सईद के रूखसती के बाद से ही यह लगने लगा था कि अब पीडीपी और भाजपा के बीच जारी गठजोड़ लंबे समय तक नहीं चल सकेगा.

इसके पीछे कारण चाहे जो भी रहा हो, लेकिन इस निर्णय से भाजपा को जोर का झटका लगा है. जानकार यह मान रहे हैं कि पीडीपी को भाजपा के साथ गठजोड़ के बाद ही यह लगने लगा था कि अब उसके लिए यह बेहतर सौदा साबित नहीं रहेगा. क्योंकि पीडीपी का जनाधार घाटी में सबसे मजबूत है और भाजपा भी उसी क्षेत्र पर नजर लगाए हुए थी.

ऐसे में पीडीपी के रणनीतिकार भाजपा से अलग होने का बहाना ढुंढ रहे थे. इसी बीच मुफ्ती साहब के रूख सत होने के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केन्द्र सरकार पर उनके पिता को अंतिम समय में वाजिब सम्मान नहीं देने का आरोप लगा कर यह साफ कर दिया था कि वह भाजपा के इशारा पर नहीं चलेंगी. इतना ही नहीं इस बीच महबूबा को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के कंधे का सहारा मिला और वह उसे अधार बनाकर नई समीकरण के तलाश में जुट गई .

जम्मू में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में की आप हवा में सरकार नहीं बना सकते. मुद्दा ये है कि कैसे बढिय़ा माहौल तैयार किया जाए ताकि नई सरकार बने तो लोगों के बीच में प्रतिष्ठा कायम करने का रास्ता तैयार हो
सके. इसके लिए आप के पास सरकार का समर्थन होना चाहिए. अगर हमें
यह मिलता है तो ठीक है नहीं तो हम आगे बढ़ेंगे जैसा कि हम अभी तक करते आए हैं.

विश्वास बहाली के नए कदमों की घोषणा को लेकर पीडीपी चीफ ने बीजेपी के आरोपों पर भी निशाना साधा उन्होंने कहा कि इन कदमों का मकसद सरकार बनने से सकारात्मक माहौल तैयार करना है. और इसे बैलेकमेलिंग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. महबूबा ने कहा कि नए कदम राजनैतिक होने चाहिए आर्थिक नहीं. बता दे कि एक दिन पहले ही जम्मू कश्मीर के गवर्नर एनएल बोरा ने एडवाइजरों की नियुक्ति है उनके इस कदम को केन्द्र सरकार द्वारा दबाब बनाने के तौर पर देखा जा रहा है ताकि यह दिखाया जा सके कि वह राज्य में लम्बे समय तक राष्ट्रपति शासन के प्रतिकूल नहीं है.

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