संसार भर के बौद्ध धर्मियों और बौद्ध राष्ट्रों का प्रमुख केंद्र बिहार राज्य स्थित बोधगया के महाबोधि मंदिर पर बहुत बड़ा विनाशकारी हमला समय रहते नाकाम कर दिया गया.

यहां पर लगे हुए बोधि वृक्ष के नीचे साधनारत् सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ और उन्हें बुद्धत्व प्राप्त होकर वे यहां बुद्ध बने थे. बौद्ध धर्म का प्रादुर्भाव नेपाल व भारत में हुआ था और यहां नेपाल के लुम्बनी में उनका जन्म और भारत के कुशी नगर में उनका महाप्रयाण हुआ था.

भारत का राज्य सिक्किम पूरी तरह बौद्ध है और निकटतम राष्ट्रों में भूटान, म्यनमार, श्रीलंका, थाईलैंड, कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम, मंगोलिया और जापान बौद्ध धर्मी राष्ट्र हैं. चीन की भी बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है लेकिन उसने भारत की तरह किसी धर्म विशेष को राजधर्म घोषित नहीं किया है.

तिब्बत पूरी तरह बौद्ध है और चीन ने उस पर बलात उपनिवेशिक कब्जा जमा लिया है. लेकिन वह तिब्बत व चीन में लोगों की दलाई लामा के प्रति आस्था को डिगा नहीं पा रहा है. इसी संदर्भ में उसने हाल ही में चीन ने सार्वजनिक रूप से लोगों से अपील की है कि चीन माक्र्सवादी विचारधारा का राष्ट्र है और इसलिये वे किसी धर्म के प्रति लगाव नहीं रखें.

इसी संदर्भ में हाल ही में बोधगया के श्रेष्ठतम बौद्ध महाबोध मंदिर में 20 जनवरी को मंदिर परिसर में पाये गये दो अत्यन्त विनाशकारी (हाई इन्टेनसिटी) के दो बमों को पाये जाने को देखा जा रहा है. जिन्हें पास की निरन्जना नदी में नष्ट (डिफ्यूज) कर दिया गया है.

नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेन्सी (एन.आई.ए.) और सी.आर.पी. पुलिस ने समय रहते इन बमों का पता लगा लिया था और इसकी गहन जांच पड़ताल प्रारंभ हो गयी है. गया-बोध गया मार्ग फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है. ये बम महाबोधि मंदिर के गेट नंबर 4 के पास मिले. इसके पास ही श्रीलंका बौद्ध मठ स्थित है.

यहीं पर बड़ी संख्या में कई देशों के बौद्धधर्मी तीर्थयात्री परम पूज्य दलाई लामा का प्रवचन सुन रहे थे. यदि दोनों बमों का वहां विस्फोट हो जाता तो बड़ी संख्या में बौद्धधर्मी मारे जाते और सभी बौद्ध राष्ट्रों में भारी प्रतिक्रिया होती.

इतने हाई इन्टेनसिटी के बम केवल सेनाओं के पास रहते हैं और उन्हें लाने लगाने में सैनिक ज्ञान की दक्षता भी होनी चाहिए. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इन बमों के पीछे किसी राष्ट्र का हाथ हो सकता है और उनका लक्ष्य दलाई लामा पर हमला करना था.

दलाई लामा को भारत सरकार राष्ट्राध्यक्ष(हेड ऑफ स्टेट) के समकक्ष सुरक्षा का दर्जा दिया है और उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी राष्ट्रपति स्तर की होती है? नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेन्सी सभी पहलुओं से यहां जांच कर रही है.

कुछ वर्षों पूर्व भी महाबोधि मन्दिर परिसर में दो बम विस्फोट हो चुके हैं. उस समय इन्हें रोहिंग्या मुसलमानों से जोडक़र देखा गया था. हालांकि भारत का रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या से कोई लेना-देना नहीं है. वह म्यानमार का आंतरिक मामला है. ये लोग वहां सैनिक कार्यवाही होने पर भागकर बांग्लादेश व भारत आ जाते हैं.

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