200 साल पुराने युद्ध की वर्षगांठ बनी हिंसा का सबब, एक की मौत

शौर्य दिवस

  • पुणे में दलित की मौत के बाद तनाव बरकरार
  • 100 लोग हिरासत में, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर लंबा जाम
  • स्कूल कॉलेज बंद, ट्रेन सेवाएं भी रोकी
  • मुंबई के चेंबूर सहित पूरे शहर में तनाव
  • बसों में की गई तोडफ़ोड़, अनेक घायल
  • भारी सुरक्षा बल तैनात, बस सेवा शुरू
  • जिग्नेश-उमर के खिलाफ शिकायत दर्ज

पुणे/नई दिल्ली,

महाराष्ट्र के पुणे में सोमवार को भीम कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ मनाने जुटे लाखों दलितों की मराठा संगठनों से हिंसक झड़प होने के बाद दलित समुदाय ने मंगलवार को बंद का आह्वान किया है. इस हिंसक झड़प में एक शख्स की मौत हो गई और कई घायल हो गए थे.

मुंबई के कई हिस्सों में धारा 144 लगा दी गई है. हिंसा को लेकर पुलिस ने मुंबई में अलग-अलग जगह से करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया है. इस मामले पर महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री दीपक केसरकार ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है. राज्य में कोई भी गलत संदेश नहीं फैलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि मैं सभी से शांति बनाए रखने की दरख्वास्त करता हूं. संपत्ति को नुकसान पहुंचा है और एक शख्स की भी मौत हुई है. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए. इससे पहले सैकड़ों की तादाद में गुस्साए लोगों ने मुलुंद, चेम्बुर, भांडुप, विकरौली के रमाबाई आंबेडकर नगर और कुर्ला के नेहरू नगर में ट्रेन ऑपरेशंस को रोक दिया. पुणे के हड़पसर और फुर्सुंगी में बसों के साथ तोडफ़ोड़ की गई है. एहतियात के तौर कई क्षेत्रों में बसों को रद्द कर दिया है.

दरअसल, यह पूरा विवाद 1 जनवरी 1818 के दिन हुए उस युद्ध को लेकर है, जो अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच कोरेगांव भीमा में लड़ा गया था. इस युद्ध में अंग्रेजों ने पेशवा को शिकस्त दे दी थी.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज में बड़ी संख्या में दलित भी शामिल थे. अब इस युद्ध में अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए ही पुणे में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिस पर बवाल हो गया. दलित और मराठा समुदाय के लोग सड़क पर आ गए. महार रेजीमेंट की स्थापना भी इसी समय हुई थी. ऐसे में और भी रेजीमेंट अपनी-अपनी जीत पर जश्न मनाएं तो क्या इसे उचित माना जाएगा?

मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश दिए

राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक जांच की मांग की है और युवक की हत्या मामले की जांच सीआईडी को सौंपने का ऐलान किया है. महाराष्ट्र सरकार ने पीडि़त परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी ऐलान किया है.

“कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस हिंसा को लेकर आरएसएस और बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने मंगलवार शाम ट्वीट कर कहा कि भारत के लिए आरएसएसऔर बीजेपी का फासीवादी दृष्टिकोण ही यही है कि दलितों को भारतीय समाज में निम्न स्तर पर ही बने रहना चाहिए. राहुल गांधी ने उना की घटना और रोहित वेमुला का भी जिक्र किया. कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, उना, रोहित वेमुला और अब भीमा-कोरेगांव प्रतिरोध के सशक्त प्रतीक हैं.”

हिंसा को लेकर विरोध प्रदर्शन, बंद आज

वहीं दूसरी तरफ दलितों के आंदोलन की वजह से मुंबई को पुणे से जोडऩे वाली ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर लंबा जाम लग गया है. मुंबई में सुरक्षा के लिहाज से अधिकांश स्कूल और कॉलेजों को बंद करा दिया गया है. हिंसा के बाद भारिपा बहुजन महासंघ (बीबीएम) नेता प्रकाश अंबेडकर ने दलित युवक की मौत के बाद बुधवार को महाराष्ट्र बंद बुलाया है.

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