नई दिल्ली संचार द्वारा लैंगिक आधार पर होने वाली हिंसा को लेकर कार्यशाला का आयोजन

  • देश-विदेश के वक्ताओं ने रखे विचार.

भोपाल,

यू. एस और भारत के लोगों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर है, जो लिंग के आधार पर होने वाली हिंसा की रोकथाम और समाधान का मौका प्रदान करता है, ताकि वो एक दूसरे से सीखते हुए सार्थक तरीके से समय व्यतीत कर सकें.

हमारे देशों में लोगों के बीच इस तरह का सहयोग सुनिश्चित करेगा, कि दुनिया में लड़कियां और महिलाएं प्राथमिकता बनी रहें. यह बात अपने विचार रखते हुए भोपाल संहिता सामाजिक उपक्रम, गर्ल राईजिंंग के साथ ग्लोबल इंडिया फं ड यू.एस. एम्बेसी की पार्टनरशिप में लिंग के आधार पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए प्रभावशाली संचार रणनीतियों पर कार्यशाला में जॉर्ज वॉशिंंगटन यूनिवर्सिटी से आई डॉ. अमिता एन व्यास ने कही.

इसी कड़ी में जॉर्ज वॉशिंंगटन यूनिवर्सिटी से आई डॉ. कैरेन ए, मैकडॉनेल ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा हमारे समय का सबसे बड़ा अन्याय है, मैं लिंग के आधार पर हिंसा के खिलाफ कार्यवाही और रोकथाम के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पडऩे वाले प्रभावों की जानकारी भारत में सामुदायिक नेतृत्वकर्ताओं को देने के लिए आशान्वित हूं.

मुझे विश्वास है कि मैं उनसे काफ ी कुछ सीखूंगी, जो मैं यू.एस में वापस आकर लोगों को बता सकूंगी. संचार के रचनात्मक टूल्स और समाधान पर केंद्रित स्टोरीटेलिंग का उपयोग करके ये कार्यशालाएं नीतिगत कमियों को संबोधित करेंगी, वैश्विक अनुभवों पर चर्चा करेंगी और यू. एस, दक्षिण एशियाई एवं राष्ट्रीय विशेेषज्ञों के साथ संलग्न होकर स्टेकहोल्डर की सामथ्र्य का निर्माण करेंगी एवं स्टेकहोल्डर्स के नेटवर्क को सपोर्ट करेंगी.

कार्यशाला में मुख्य रु प से वर्तमान स्थानीय परिदृश्य की कमियों को पहचानना और उन्हें दूर करने का प्रयास करना, नए कार्यक्रमों, सीख एवं सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों के लिए विचारों की क्रॉस फ र्टिलाई, बढ़ाने के लिए वैश्विक अनुभवों पर चर्चा,व लिंग पर आधारित हिंसा को रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर सार्थक प्रयासों की जरूरत है, इन सभी विषयों को लेकर विभिन्न सत्रों में चर्चा हुई.

यहां पर कैसे प्रभावी संचार करके हम महिला हिंसा और रेप जैसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठा सकते है. व सोशल मीडिया व संचार के अन्य माध्यम किस प्रकार सहायक हो सकते है, इन विषयों पर चर्चा हुई.
जया, नेपाल

लैंगिक असमानता के सूचकांक में भारत 142 देशों की सूची में 125 वें नंबर पर है, यही कारण है कि ग्लोबल इंडिया ने 2 शहरों में 4 दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन किया, इसकी तीसरी कार्यशाला का समापन भोपाल में हुआ. और यहां पर हमने जाना कि किस तरह से सोशल मीडिया के माध्यम से इन सभी हिंसा को रोका जा सकता है.
साजरीन, आयोजक , समिति सदस्य

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