20sebiमुंबई, पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचीबद्ध कंपनियों के महिला निदेशकों की नियुक्ति को नजरअंदाज करने को शर्मनाक बताते हुए शुक्रवार को कहा कि कंपनियों को इस माह के अंत तक बोर्ड में इनकी नियुक्ति करनी होगी अन्यथा उनके खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी।

नियामक के अध्यक्ष यू.के. सिन्हा ने कहा कि मुझे लगता है कि देश में आठ से नौ हजार सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा बोर्ड में एक भी महिला निदेशक की नियुक्ति नहीं कर पाना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने इन चर्चाओं को भी खारिज कर दिया कि फरवरी 2014 में घोषित नये नियमों का पालन नहीं करने के बावजूद कंपनियों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सेबी ने महिला निदेशक की नियुक्ति के लिए कंपनियों को 01 अक्टूबर 2014 की निर्धारित समय सीमा छह माह के लिए बढ़ायी थी और कहा कि सभी सूचीबद्ध कंपनियां निदेशक मंडल में 01 अप्रैल 2015 से पहले कम-से-कम एक महिला निदेशक की नियुक्ति करे। कौन कहा रहा है कि ऐसा नहीं करने पर वह दंड के भागी नहीं होंगे। सेबी के सभी नियम विधि द्वारा लागू किये गए हैं। मुझे याद है वर्ष 2013 में जब मैं कंपनियों में 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता पर जोर दे रहा था तब भी लोगों को लगा कि यह कंपनियों की इच्छा पर है न कि कानून द्वारा प्रवर्तित। यह बिल्कुल गलत है, आंकड़े देखे जा सकते हैं। कई कंपनियां हैं जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

महिला निदेशक की नियुक्ति नहीं करने की स्थिति में कंपनियों को परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। नियामक ने पाया कि शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों में से एक-तिहाई के बोर्ड में भी महिला निदेशक नहीं है। उसने हाल ही में शेयर बाज़ारों को इसे तय समयसीमा के भीतर लागू करने का निर्देश दिया है। सेबी ने कंपनी मामलों के मंत्रालय के साथ ही पंद्रह दिन से कम समय में 160 कंपनियों को इसे लागू करने के लिए पत्र लिखा है।

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