सडक़ पर शराब के नशे में धुत कार सवार लोगों का मामला इसलिए पुलिस को रफा दफा करना पड़ा कि शिकायतकर्ता मंत्री ने शिकायत दर्ज नहीं करायी. इसी से यह पता चलता है कि प्रदेश में रेत माफिया की सत्ता पक्ष व राजनीति में कितनी पकड़ व जकड़ है कि मिनिस्टर भी पीछे हट गये. इटारसी का रेत माफिया के लोगों ने यह कहा कि उन्हें मंत्री की कार ने साइड नहीं दी थी. इसलिए वे ड्राइवर से भिड़ गये और मिनिस्टर से उलझ गये. मंत्री ने ही पुलिस बुलाई. पुलिस ने भी तुरन्त कार्यवाही कर कार सहित सभी को दबोच लिया और थाने ले आये. थाने में उन्होंने बताया कि वह विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा के खासम-खास है. श्री शर्मा इटारसी के ही रहने वाले है. इसके बाद एक माफीनामे का ड्रामा हुआ. उनको मंत्री ने उन्हें माफ कर दिया. पुलिस मेें रिपोर्ट नहीं लिखायी. पुलिस ने मामला सिर्फ दर्ज किया कि वो नशे मेें गाड़ी चला रहे थे. उनकी थाने से ही जमानत हो गयी. वे उनकी कार दोनों छोड़ दिये गये. अवैध खनन में नर्मदा को संरक्षण देने की बात तो मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान गर्जना के रूप में करते जा रहे हैं लेकिन संरक्षण नर्मदा को नहीं बल्कि उसे अवैध खनन से बर्बाद तबाह करने वाले माफिया को दिया जाता है. रेत मुफ्त का माल है और भारी मुनाफे का धंधा है. इनके पास रुपया काफी है- चुनाव भी सिर पर आ रहे हैं माफिया धन बल से मदद कर देगा.लेकिन इस तरह मामले को रफा-दफा करने से नर्मदा अन्य नदियों का अवैध रेत खनन और तेजी से आगे बढ़ेगा.