malyaमुंबई,  प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) की मांग पर मुंबई की अदालत ने करोड़ों रुपये के लोन डिफॉल्टर विजय माल्या को भगोड़ा घोषित कर दिया. ईडी ने अदालत से अपील की थी कि चूंकि माल्या जानबूझ कर गिरफ्तारी से बचने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं इसलिए उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया जाए.

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत का रुख कर शराब कारोबारी विजय माल्या को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी. एक कथित बैंक कर्ज फर्जीवाड़े के मामले में माल्या के खिलाफ की जा रही धनशोधन की जांच के सिलसिले में ईडी ने उन्हें भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी.

अधिकारियों ने कहा था कि एजेंसी ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह सीआरपीसी की धारा 82 के तहत एक आदेश पारित कर माल्या को भगोड़ा घोषित कर दे, क्योंकि उनके खिलाफ ‘बहुत सारे’ गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं. इसमें धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत जारी किया गया एक गैर-जमानती वारंट भी शामिल है. उन्होंने बताया था कि अदालत ईडी की अर्जी पर 13 जून को आदेश पारित कर सकती है. अधिकारियों ने बताया था, माल्या के खिलाफ विभिन्न मामलों में बहुत सारे गिरफ्तारी वारंट लंबित पड़े हैं. उनमें चेक बाउंस का भी एक मामला है और धनशोधन के मामले में भी उनकी तलाश है.

एजेंसी ने मामले की जांच की स्थिति से अदालत को अवगत करा दिया है और माल्या को जांच में शामिल होने की जरूरत है. उन्होंने बताया था कि इस मामले में मुंबई की उसी विशेष पीएमएलए अदालत का रुख किया गया है जिसने पिछले दिनों माल्या के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था. उल्लेखनीय है कि किसी आपराधिक मामले में कोई अदालत किसी व्यक्ति को तभी भगोड़ा घोषित करती है जब अदालत के पास यह यकीन करने की वजहें हों कि जिस आरोपी के खिलाफ उसने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, वह फरार हो चुका है या अपने आप को छुपा रहा है ताकि वारंट तामील न कराया जा सके.

आपको बता दें कि माल्या अपने राजनयिक पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए दो मार्च को भारत छोड़कर चले गए थे. पिछले साल सीबीआई की ओर से दर्ज की गई एक प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने माल्या एवं अन्य के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया है. ईडी, किंगफिशर एयरलाइंस के वित्तीय ढांचे और कर्ज लेने के लिए कमीशन के कथित भुगतान के आरोपों की भी छानबीन कर रही है.

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