kohliचेन्नई,  वाकई बहुत अच्छा टॉस जीता धोनी ने और इसी के साथ सिरीज 2-2 की बराबरी पर आकर जीवंत हो उठी अगले रविवार को मुंबई में फाइनल भिड़ंत के लिए. खेल का एक घंटे पहले आरंभ होना, ओस की लगभग नगण्य भूमिका, शाम को दूधिया प्रकाश के बीच सीम, स्विंग, स्पिन और दोहरी उछाल, टारगेट का पीछा करने वाली टीम के लिए कहीं से भी मुफीद परिस्थितियां नहीं कही जा सकती थीं.
दो राय नहीं कि डिविलियर्स ने सिरीज में दूसरे शतकीय प्रहार से एक बार फिर खुद को दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में से एक का दावा बरकरार रखा.

डिविलियर्स ने दिखाया कि बल्लेबाज यदि संपूर्ण है तो पिच और परिस्थितियां उसके लिए बहुत ज्यादा मायने नहीं रखतीं. लेकिन आपको दूसरे छोर पर साथी भी चाहिए जो नहीं मिला और इक्कीस पड़ गया विराट कोहली का अर्से बाद वही पुरानी प्रचंडता के साथ लगाया गया शतक, जिसके फलस्वरूप मेहमान दक्षिण अफ्रीका के सम्मुख तीन सौ का लक्ष्य कुछ ज्यादा ही भारी साबित हो गया. इस मुकाबले को याद किया जाएगा कोहली की 138 रनों की जबरदस्त पारी के लिए, जिसमें अर्से बाद उन्होंने शुरुआती हिचक से उबर कर लय पाई और क्या पेस और क्या स्पिन दोनों पर अपना निर्विवाद वर्चस्व कायम किया.

 

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