rajanहांगकांग, रिजर्व बैंक (आरबीआई) गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि अगस्त में अपनी मुद्रा युआन के अवमूल्यन को लेकर चीन को दुनिया में मुद्रा युद्ध आरंभ करने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित साक्षात्कार में श्री राजन ने कहा, “चीन के (अवमूल्यन के) कदम से पहले ही कई देशों के अपारंपरिक मौद्रिक नीति अपनाने के कारण उनकी मुद्राएँ काफी हद तक कमजोर पड़ रही थीं।

यह कहना उचित नहीं होगा कि चीन के कदम से इसमें तेजी आयी। दूसरी बात यह कि चीन द्वारा किया गया अवमूल्यन मामूली था और इसलिए उसे मुद्रा युद्ध के लिए जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता।” चीनी मुद्रा युआन को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा अपने मुद्रा भंडार में शामिल करने के प्रस्ताव पर श्री राजन ने कहा कि वह इस बात का समर्थन करते हैं कि वैश्विक व्यापार और वित्तीय मंच पर बड़ी पैठ रखने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा इसमें शामिल की जानी चाहिये।

हालाँकि, उन्होंने कहा यह भी कहा कि आईएमएफ ने इसके लिए क्या पैमाना रखा है और इस पर कहाँ तक खरी उतरती है इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर चीन ने इस दिशा में काफी प्रगति की है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी बहुस्तरीय संस्थाएँ उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों की ओर अब ज्यादा ध्यान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यह स्थिति बनी रहेगी और बहुस्तरीय संस्थाओं को अपने प्रशासनिक ढाँचे में बदलाव करने की जरूरत है।