काश्मीर में 1 मार्च को पीडीपी-भाजपा की साझा सरकार के पीडीपी कोटे के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अपने पहले बयान में ही उनके आका पाकिस्तान, हुर्रियत व अलगाव तत्वों का इस बात के लिए शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने ‘रियासत’ कश्मीर के विधानसभा के चुनाव शांतिपूर्ण होने दिये. अगर वे ऐसा कुछ करते तो ऐसा चुनाव नहीं होता.

इस राष्ट्रदोही बयान की वजह से संसद में हंगामा हो गया- पूरा विपक्ष लामबंद होकर प्रधानमंत्री श्री मोदी से बयान की मांग करने लगा- वे मुफ्ती के शपथ ग्रहण समारोह में जम्मू गये थे. वे संसद में थे. केन्टीन में खाना खाने तो गये, लेकिन लोकसभा व राज्यसभा में इस गंभीर मामले पर कुछ नहीं बोले. केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वेे जम्मू-काश्मीर में सफल, शांतिपूर्ण चुनावों का पूरा श्रेय भारत के चुनाव आयोग, भारतीय फौज और राज्य की जनता को देते हैं और मुफ्ती के बयान को पूरी तरह खारिज करते हैं. पूरा उत्तेजित विपक्ष प्रधानमंत्री का बयान ही चाहता है और सम्पूर्ण विपक्ष ने एक साथ इसके विरोध में वाकआउट किया. दूसरी ओर मुफ्ती जरूर बोले और यह कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं- जो कहना था- कह दिया. पाकिस्तान व हुर्रियत ने उनकी बात व चुनाव की ताकत को समझा है. इससे भी यह साफ ही हो जाता है कि इस बार मुफ्ती की पीडीपी को जो इतना समर्थन मिला कि उसे 28 सीटें प्राप्त हुईं, उसके पीछे पाकिस्तान व हुर्रियत व अलगाववादी का समर्थन रहा है. वर्ना हर चुनाव में पाकिस्तान के शह व मशविरे पर हुर्रियत व अलगाववादी चुनाव का बहिष्कार करते आ रहे थे.

ऐसा भी जाहिर होता है कि पाकिस्तान हुर्रियत व अलगाववादियों की इस बार यह साजिश है कि मुफ्ती को तो सरकार में बिठाओ और उसकी सरकार की आड़ में काश्मीर हथियाने के अपने मंसूबे पूरे करो. मुफ्ती और हुर्रियत दोनों की एक खास मांग यही है कि काश्मीर से भारतीय फौजें हटा ली जायें.
हर देश की सार्वभौमिकता में यह मान्यता है कि देश की फौजें देश में कहीं भी रखी जाएं चाहे स्थिति शांत हो या अशांत. लेकिन काश्मीर एक अशांत क्षेत्र है- यह विश्व भर को ज्ञात है. वहां फौज रहे या न रहे इससे किसी राज्य सरकार को कुछ लेना-देना नहीं है. भारत भर में हर राज्य में फौजी कमांड व बटालियनें रहती हैं. मुफ्ती व हुर्रियत की तकलीफ यही है कि फौज के रहते उनके भारत विरोधी-राष्टï्र विरोधी मंसूबे पूरे नहीं हो सकते. जिस तरह मुसलमानों को हर राज्य में हज यात्रा के लिए हज हाऊस बनाने को जगह दी गयी है, उसी तरह श्रीनगर में अमरनाथ यात्रा के लिए जमीन देने का मुफ्ती परिवार ने कड़ा विरोध किया था और इन्होंने जितना कड़ा विरोध किया उससे ज्यादा कड़ा व प्रखर विरोध जम्मू के हिंदुओं ने किया और घाटी की आर्थिक नाकाबंदी कर दी और मुफ्ती को झुकाया. एक समय काश्मीर में राज्यपाल रहे लेफ्टीनेंट जनरल एस.के. सिन्हा ने कहा था कि मुफ्ती उनकी गवर्नरी में मुख्यमंत्री रहा है. ये शख्स और इसकी पीडीपी मुस्लिम फिरका परस्त (साम्प्रदायिक), पाकिस्तान समर्थक, भारत विरोधी है इस पर कभी भरोसा नहीं किया जाना चाहिए. ऐसा लगता है कि सत्ता पाने के लालच में भारतीय जनता पार्टी ने उस शख्स व पार्टी पर भरोसा कर साझा सरकार बना ली जो खुले तौर पर देशद्रोही है और वह अपने पहले बयान से ही उसी रंग में आ गया.

क्या विडम्बना है कि कल (1 मार्च को) प्रधानमंत्री श्री मोदी उसके शपथ ग्रहण समारोह में जाते हैं और आज (2 मार्च) को लोकसभा में उन्हीं की सरकार के गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह यह कहते हैं कि मुफ्ती के बयान को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं. वहां जो भी चुनाव हुए हैं उसका श्रेय चुनाव आयोग, फौजों व जनता को ही जायेगा. भारतीय जनता पार्टी को फौरन उस सरकार से बाहर आकर उसे भी सत्ता से बाहर करना चाहिये. 1 मार्च को नागपंचमी मनाकर सांप को दूध पिला दिया.

Related Posts: