इस्लाम के नाम पर पिछले चार दशकों से चले आ रहे आतंक का सबसे ज्यादा असर अरब के मुस्लिम राष्ट्रों  पर ही हो रहा है. बगदादी के इस्लामी स्टेट के आतंकवाद ने क्रूरता की सभी हदें पार कर दी हैं. वह जो कहे और चाहे वही इस्लाम है. अब अरब राष्ट्रों में ही मस्जिदों पर हमले होने लगे हैं. नमाज के समय नमाजियों को गोली व विस्फोट से उड़ा रहे हैं.

मिस्र के सिनाई क्षेत्र में नमाज पढ़ते समय इस्लामी स्टेट ने शुक्रवार के रोज एक मस्जिद में बम विस्फोट कर मशीन गन से गोलियां दाग दी जिसमें 230 नमाजी लोग मारे गये. नमाज के समय मस्जिद के इर्द-गिर्द 40 आतंकी मशीनगन लिये जीपों में उसे घेरकर जम गये और चारों तरफ से उस पर गोलियों की बौछार कर दी.

इस्लामी स्टेट के आतंकी हमलों में सीरिया और इराक में युद्ध का विनाश पूरे राष्ट्रों को खत्म ही कर चुका है. सीरिया के लगभग सभी लोग भागकर दूसरे देशों में खासकर ईसाई धर्म के यूरोप में पनाह लिये पड़े हैं और वहां से भी इन्हें वापस जाने को कहा जा रहा है.

ईरान में कई आतंकी हमले हो चुके हैं. पाकिस्तान में एक अरसे से सुन्नी आतंकी शिया मस्जिदों पर हमले करते जा रहे हैं. पाकिस्तान से जो शिया मुसलमान शिया राष्ट्रों  ईरान में जियारत (तीर्थयात्रा) पर जाते हैं उनकी बसों को घेर कर उन पर जानलेवा हमले किये जा रहे हैं.

अरब राष्ट्रों में सऊदी अरब सुन्नी और ईरान शिया राष्ट्रों हैं लेकिन इस्लामी स्टेट के आतंक से सभी अरब राष्ट्रों गंभीर संकट में आ चुके हैं. सऊदी अरब की राजधानी रियाद में इस आतंक के विरुद्ध 40 मुस्लिम अरब राष्ट्रों ने गठबंधन बना कर इस्लामिक स्टेट के आतंकवाद को खत्म करने का निर्णय लिया है.

बैठक की सदारत करते हुए सऊदी क्राउन प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान ने इसे सारी दुनिया का संकट बताते हुए कहा है कि 40 अरब राष्ट्रों के आतंक विरोधी गठबंधन को दुनिया से आतंक के सफाये तक इसके विरुद्ध जंग जारी रखनी चाहिये. बीते कुछ सालों से आतंकवाद हम सभी देशों के भीतर पैर पसार चुका है. इसके लिये सभी राष्ट्रों को आपस में समन्वय बनाना होगा.

पाकिस्तान में आतंकवाद इस हद तक हावी हो चुका है कि वहां इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज शौकत अजीज ने अदालत में कहा कि उन्हें या तो मार दिया जायेगा या लापता कर दिया जायेगा. इन्हीं जज ने कुछ दिन पहले यह फैसला दिया था कि राजधानी इस्लामाबाद को जो इस्लामी कट्टरवादी  प्रदर्शनकारी व आतंकी घेरा डाले हुए है, उन्हें पुलिस व सरकार फौरन हटाये.

इसके बाद ही उन पर पुलिस कार्रवाई की गयी. सेना को वहां कार्य करने को कहा गया था- लेकिन सेना ने सरकार का आदेश नहीं माना.अदालत में अब सरकार ने यह कहा है कि सेना की मदद से सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सुलह हो गयी है. इस पर जज ने पूरी तल्खी से सरकार के गृहमंत्री से पूछा कि सेना सुलह कराने वाली कौन होती है? किस कानून में उसे यह रोल दिया गया?

 

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