प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी पठानकोट एयरबेस पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद के हमले के बाद वहां स्थिति का जायजा लेने पहुंचे. साथ ही उन्होंने नियंत्रण रेखा के ऊपर भी उड़ान भरी और उन स्थानों पर गौर किया जहां सेे घुसपैठ होती रहती है.

भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित वार्ताओं पर ‘लाहौर से लाहौर तकÓ का एक अजीब सिलसिला जुड़ गया है. पहली बार एन.डी.ए.-भाजपा सरकार के प्रधामंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ‘बस डिप्लोमेसीÓ के नाम से जानी जाने वाली बस से लाहौर प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ से मिलने गये थे. उसके कुछ दिन बाद ही तात्कालीन पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ ने वार्ता को नेस्तनाबूत करने के लिये कारगिल में भारत के विरुद्ध जंग छेड़ दी. वह अपने नापाक इरादों में सफल भी हुए और वार्ताओं का दौर खत्म होकर दोनों देशों में कटुता और बढ़ गयी.

इस बार भी भाजपा के ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी श्री नवाज शरीफ से मिलने अफगानिस्तान से लौटते हुए लाहौर उनके घर मिलने चले गये. यह शासकीय और निजी दोनों तरह की एक रस्म अदायगी की मुलाकात थी लेकिन इससे वातावरण और नजदीकी बनाने में बहुत मदद मिली. इससे कुछ दिन पहले ही विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज भी पाकिस्तान गयी थीं और श्री नवाज शरीफ से मिली थी. आगामी 15 जनवरी को दोनों देशों के विदेश सचिवों की वार्ता प्रस्तावित है. जिसे उसके आगे होने वाली मोदी-नवाज भेंट का एजेंडा व वातावरण तैयार करना था.

ऐसा लगने लगा था कि दोनों ही नेता व देश यह चाहते हैं कि परस्पर संबंध ठीक होने चाहिए, लेकिन ऐसे में कारगिल की तरह इस बार भी वार्ताओं के दौर को खत्म करने के लिये पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पठानकोट एयरबैस पर हमला कर दिया. इससे वार्ता के वातावरण पर दुष्प्रभाव तो अवश्य पड़ा है, लेकिन अभी तक वार्ताओं को रद्द नहीं किया गया है. कारगिल में फौजों ने हमला किया था, लेकिन इस बार फौजों के प्रमुख जनरल रहील शरीफ, खुफिया एजेन्सी आई.एस.आई. प्रमुख व पाक के रक्षा मंत्री श्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ सभी ने पठानकोट हमले की निन्दा करते हुए कहा है कि वे जैश-ए-मोहम्मद के विरुद्ध कार्यवाही कर रहे हैं और भारत-पाक वार्ता के वातावरण को खत्म नहीं होने देंगे. श्री नवाज शरीफ ने भी श्री मोदी को यह भरोसा दिलाया है कि भारत जो भी तथ्य दे रहा है- उसके आधार पर पठानकोट हमले में जैश की लिप्तता की जांच व कार्यवाही भी की जायेगी.

भारत अभी पाकिस्तान के रुख व सक्रियता को देख रहा है. उसके बाद ही कुछ ही दिन में यह भी तय हो जायेगा कि 15 जनवरी को सचिव स्तर की वार्ता की जाए या नहीं. भारत भी यही चाहता है कि वार्तायें चलती रहें. लेकिन अब यह पाकिस्तान सरकार की जवाबदेही व जिम्मेदारी पर निर्भर करता है.