प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अपनी इस पृष्ठभूमि को कि वे बचपन में चाय बेचते थे बार-बार कह कर उसे न सिर्फ अतिरंजित कर रहे हैं बल्कि शालीनता की परिधि से भी बाहर चले गये हैं. इस बात पर भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने उन्हें आईना दिखा दिया कि मैं नहीं चाहता कि कोई मेरे सादगी व अभावों भरी पृष्ठभूमि के कारण कोई मुझ पर तरस खाये.

श्री मोदी चुनाव सभाओं में इस बात का उल्लेख इसलिए कर रहे हैं कि लोग उन पर तरस खाकर उनकी पार्टी को वोट दें. लोकसभा के चुनावों में भी वे दो ही बातें का उल्लेख करते रहे एक तो वे चाय बेचते हुए ऊपर तक आये और दूसरा यह कि देश में इतना काला धन है कि 125 करोड़ लोगों के हर व्यक्ति के खाते में 15-15 लाख रुपये आ जायेंगे.

उनका कालाधन का वायदा उनके ही पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित शाह ने उसे महज एक जुमला बताते हुए नेस्तनाबूत कर दिया. श्री मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में यही सबसे बड़ा फ्लाप है कि वे वह काला धन वापस नहीं ला पाये. वह ‘जुमला’ लोगों से महज वोट पाने का प्रपन्च मात्र था.

उनका ‘चाय बेचने’ का फार्मूला भी एक प्रपन्च है. गुजरात के वडऩगर रेलवे स्टेशन पर उनके पिता श्री दामोदर दास का चाय स्टाल का ठेका था. यह भी स्कूल के बाद के समय में वहां हाथ बटाने स्टाल पर चले जाते थे. ये चाय स्टाल ठेकेदार के बेटे थे. चाय बेचने वाले मजदूर नहीं थे.

हमेशा से और आज भी ऐसे हजारों लाखों बच्चे हैं जो अपने पिता के छोटे-मोटे चाय स्टाल जैसे धंधे में हाथ बटाते हैं, वहां जाकर बैठते हैं. श्री मोदी चाय बेचते थे इसका किसी संदर्भ में उल्लेख तो ठीक है लेकिन उसे वोट पाने के लिए दया भाव उपजाने का प्रयास करना राजनैतिक ढकोसला ही है. इस मामले में वे अपने आपको एक अद्भुत व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं जैसे यह उनका करिश्मा है कि चाय बेचने वाले से प्रधानमंत्री बन गए.

आज जो राष्टï्रपति श्री रामनाथ कोविन्द हैं वे तो श्री मोदी से भी कहीं ज्यादा गरीब परिस्थिति से आये हैं. एक गांव में माता-पिता की 9 संतानों में से एक थे. झोपड़ी में रहते थे जो बरसात में
टपकती थी.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस के दिग्गज नेता श्री वीरप्पा मोइली एक गांव में आदिवासी परिवार में जन्में. बचपन में एक बार जब वे झोपड़ी में खाना खा रहे थे तो एक साहूकार ने उनकेे परिवार को झोपड़ी से मारकर बाहर कर दिया और उनकी झोपड़ी तोड़ दी.

पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में श्री आबिद अली श्रम मंत्री थे. लोकसभा में कम्युनिस्ट विपक्ष की एक कटु आलोचना के जवाब में उन्होंने कहा था कि आप लोग सिर्फ मजदूरों के नेता हैं और मैंने कानपुर की कपड़ा मिल में एक मजदूर की हैसियत से सांचा चलाया है.

संसार भर मेें होटल व्यवसाय में अपने हैसियत रखने वाले ओबेराय ग्रुप होटल के मालिक श्री ओबेराय शिमला के कार्लटन होटल में रिसेप्शन क्लर्क थे. बाद में उन्होंने ही उस होटल को खरीद लिया. और सारी दुनिया में 5 सितारा ओबेराय होटलों की श्रृंखला खड़ी कर दी.

संसार में सैकड़ों लोग हैं जो जमीन से उठकर आसमान की बुलंदियों पर पहुंचे हैं. लेकिन ये सब श्री मोदी की तरह अपनी पृष्ठभूमि का रोना नहीं रोते हैं- उसका बखान नहीं करते हैं. मारवाडिय़ों के बारे में तो यह प्रचलित है कि वह मारवाड़ से थाली-लोटा लेकर निकले और उद्योगपति बन गये.

ऐसा महसूस किया जा सकता है कि श्री मनमोहन सिंह के कथन के बाद श्री मोदी राजनैतिक शालीनता में आ जायेंगे. श्री मोदी जिसे अपनी प्रतिभा बता रहे हैं उस अर्थ में उनसे भी ज्यादा प्रतिभाशाली लोग हैं.

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