भोपाल,

राजधानी में आजकल मौसमी बीमारियों का दौर चल रहा है, जिसमें वायरल फीवर प्रमुखता से देखने में मिल रहा है. साथ ही मलेरिया के भी कुछ मरीज दिख जाते हैं.

ज्ञात हो कि पिछले कुछ महीनों से राजधानी में डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों ने कहर बरपा रखा था. अस्पतालों में लम्बी-लम्बी कतारे देखने को मिल रही थीं परंतु अब इन बीमारियों में काफी कमी देखने को मिली है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौसम के बदलाव को इसका कारण बता रहे हैं.

मौसम के बदलाव के कारण अब मौसमी बीमारियों में वायरल फीवर काफी देखने को मिल रहा है. वायरस के संक्रमण से होने वाले बुखार को वायरल फीवर कहा जाता है. वायरल बुखार के वायरस गले में सुप्तावस्था में निष्क्रिय रहते हैं.

ठंडे वातावरण के संपर्क में आने, फ्रीज का ठंडा पानी, शीतल पेय आदि से वायरस सक्रिय होकर हमारी प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित कर देते हैं. यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी तथा बड़ी तेजी से पहुंचती है. इसके विषाणु सांस द्वारा एक से दूसरे में पहुंचते हैं. विषाणु फैलने के बाद फ्लू एक-दो दिन या कभी-कभी कुछ घंटों में सक्रिय हो जाता है.

बच्चों में वायरल बुखार

बच्चों के लिये वायरल और अधिक कष्टïदायी होता है. इससे बच्चे पीले व सुस्त पड़ जाते हैं. उन्हें सांस लेने तथा स्तनपान में कठिनाई के साथ ही उल्टी-दस्त भी हो सकते हैं. इसके अलावा बच्चों में निमोनिया, कर्णशोथ जैसी जटिलतायें भी पैदा हो जाती हैं.

दो गुनी हो गई अस्पतालों में ओपीडी

मौसमी बीमारियों के चलते अस्पतालों में ओपीडी संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. खांसी, जुकाम, वायरल फीवर, मलेरिया इत्यादि बीमारियों की वजह से अस्पतालों में भीड़ देखने को मिल रही है. गुरुवार को जिला अस्पताल जे.पी. में ओपीडी 1500 से दो हजार के लगभग पहुंच गई.

वहीं हमीदिया अस्पताल में ढाई हजार के लगभग ओपीडी रही. इसी तरह से शहर के अन्य सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ देखने को मिली.

सामान्य उपचार

-वायरल बुखार अक्सर सामान्य बुखार ही लगता है इसलिये बुखार होने पर डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिये.
-बुखार अगर 102 डिग्री तक हो और कोई खतरनाक लक्षण नहीं हैं तब मरीज की देखभाल घर पर ही कर सकते हैं.
-मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें.
-मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामॉल की गोली या सिरप दे सकते हैं. दूसरी कोई दवा डॉक्टर की सलाह के बगैर न दें.
-दो दिन तक बुखार ठीक नहीं होने की स्थिति में डाक्टरी परामर्श जरूर लें.
-मरीज को वायरल होने पर उससे थोड़ी दूरी बनाये रखें एवं मरीज द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों को इस्तेमाल न करें.
-साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें.

वायरल बुखार के लक्षण

आंखें लाल होना, इस बुखार में शरीर का तापमान 101 से 103 डिग्री या उससे ज्यादा हो जाता है, खांसी और जुकाम होना, जोड़ों में दर्द और सूजन, थकान और गले में दर्द, नाक बहना, बदन दर्द, भूख न लगना, सिरदर्द होना आदि.

 

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