modi1डर्बन,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका में पेन्ट्रिच से उस पीटरमारित्जबर्ग स्टेशन तक यादगार और भावनात्मक यात्रा की जहां पर 123 साल पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपमानित करके ट्रेन की बोगी से फेंक दिया गया था।

ट्रेन की फर्स्ट क्लास बोगी में उस वक्त सिर्फ गोरे लोग की यात्रा कर सकते थे और बापू उसी बोगी में चढ़े थे। बोगी में सवार गोरे लोगों ने पहले बापू का उतरने के लिए कहा और उनके नहीं उतरने पर उन्हें बोगी से स्टेशन पर फेंक दिया। आज की दुनिया में नस्लीय भेदभाव की उस पराकाष्ठा का बस अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन इस घटना ने महात्मा गांधी को नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया और यहीं से उनकी अहिंसक यात्रा की शुरूआत हुई।

रेलवे स्टेशन पर महात्मा गांधी के सम्मान में लगी शैल पट्टिका पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद श्री मोदी ने पत्रकारों से कहा,“यही वह जगह है,जहां मोहनदास के महात्मा बनने का बीजारोपण हुआ था। पीटरमारित्जबर्ग की यात्रा मेरे लिए सौभाग्य की बात है ।” उन्होंने कहा कि अफ्रीका की यह यात्रा उनके लिए एक तीर्थ यात्रा है। उन्हें बापू तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी तीन जगहों पर नतमस्तक होने का मौका मिला है। प्रधानमंत्री ने इस स्टेशन पर बापू के जीवन पर आधारित एक प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया ।

दक्षिण अफ्रीका द्वीप के चार देशों की यात्रा पर आये श्री मोदी ने कहा,“ गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने 21 साल लोगों की तकलीफों के खिलाफ और मूलभूत अधिकारों की लड़ाई में लगाये। इसी अवधि में उन्हें नयी ताकत मिली , जो मेरी नजर में आध्यात्मिक ताकत थी और जिसे उन्होंने राजनीतिक ताकत में तब्दील कर दिया।” उन्होंने कहा,“आज मैं यहां हूं,जहां 1893 में एक वकील यात्री मोहनदास की यात्रा बीच में ही रोक दी गयी थी लेकिन उसी दिन महानता की ओर उसकी नयी यात्रा की शुरूआत भी हुई।

” आजादी के लिए भारत की तरह दक्षिण अफ्रीका में भी लंबे समय चले स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब आज दोनों देश अपने विकास के रास्ते में आने वाली चुनौतियों से लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा,“ गांधी जी और नेल्सन मंडेला भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों देशों के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।” श्री मोदी महात्मा गांधी के फिनिक्स आश्रम भी जाएंगे। वह आज शाम तंजानिया के लिए रवाना होंगे।

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