भारत को अपनी आर्थिक व औद्योगिक प्रगति के लिये यह अनिवार्य हो गया है कि वह परमाणु ऊर्जा का विस्तार पूरे राष्ट्र में करे. अणु ऊर्जा की शुरुआत नेहरू शासन काल में अणु वैज्ञानिक डाक्टर होमी भाभा ने मुम्बई अणु ऊर्जा बनाकर शुरू कर दी. इसके बाद में शनै:-शनै: कई परमाणु ऊर्जा संयंत्र राजस्थान में कोटा, उत्तरप्रदेश में नरोरा आदि में लग चुके हैं. लेकिन इसे विस्तारित रूप में कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार ने किया. इसके लिये देश में सरकार के सहयोगी वामपंथी दलों और प्रमुख विपक्ष भारतीय जनता पार्टी के प्रबल विरोध के बाद भी अमेरिका से भारत में सिविल परमाणु ऊर्जा के लिये बड़ा करार किया. वामपंथी दलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया, लेकिन श्री मनमोहन सिंह ने उसकी परवाह न करके यह समझौता किया.
आज भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है और वह भी अब उसी परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है.

परमाणु संयंत्रों का ईंधन यूरेनियम खनिज होता है. जो भारत में अभी इतना अधिक नहीं है कि उसके भरोसे देश में परमाणु संयंत्र लगा लिये जायें. इसके लिये हमें अपने खुद के उत्पादन के अलावा यूरेनियम का इतना भंडार हमेशा तैयार रखना पड़ेगा कि किसी भी प्रकार की खनिज आयात की बाधा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के उत्पादन पर असर न पड़े. अन्यथा कई कल-कारखाने व जीवन की गतिविधियां ही ठप्प हो जायेंगी.

भारत के विकास में यह बड़ी उपलब्धि है कि इस साल देश में यूरेनियम का रिकार्ड उत्पादन हुआ है और भारत सरकार देश में यूरेनियम का भारी आयात भी कर रही है. उसका लक्ष्य देश में यूरेनियम का विशाल भंडार बनाने का है. इस साल 1252 मीट्रिक टन यूरेनियम के उत्पादन की संभावना है. खनिज उत्पादन में संभावनाएं लगभग जमीनी हकीकत की तरह निश्चित ही होती हैं. अभी हाल में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी रूस और मध्य एशिया के देशों की यात्रा पर कजकिस्तान भी गये थे. इस देश में भारी मात्रा में यूरेनियम खनिज मौजूद है. उससे भारत ने 5000 मीट्रिक टन यूरेनियम खरीद व आयात करने का समझौता किया. रूस, आस्ट्रेलिया, कनाडा, अफ्रीकी राष्टï्र नामीबिया, बोस्तवाना आदि अन्य देशों से भी यूरेनियम आयात कर रहा है. देश में बड़े पैमाने पर इसका भंडार बनाने का काम शुरू हो गया है. इरादा यह है कि कभी भी विपरीत परिस्थितियों में देश में ही यूरेनियम का इतना स्टाक रहे कि 5-10 साल तक यूरेनियम की परमाणु संयंत्रों को निर्बाध आपूर्ति बनी रहे. भारत ज्यादातर यूरेनियम आस्ट्रेलिया से आयात करता है. हमें अपने यूरेनियम के भंडार खोजने में पूरी शक्ति साधन लगा देना चाहिए. भविष्य का ईंधन यूरेनियम ही है.

भारत भौगोलिक विस्तार का विशाल भू-भाग का राष्टï्र है. लेकिन आधुनिक युग में इसके सामने ऊर्जा स्रोतों की गहन समस्या है. पेट्रोलियम में हम अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत भाग आयात करते हैं. हमारा खुद का उत्पादन मात्र 20 प्रतिशत है. इस दिशा में सघन कार्य हो रहा है और नये-नये तेल क्षेत्र मिल रहे हैं. असम पहले से पेट्रो क्षेत्र है. अब गुजरात में अंकलेश्वर, बाम्बे हाई और गोदावरी बेसिन में तेल व गैस मिले हैं. कोयला हमारे देश में इतना है कि 200 साल तक चलेगा. लेकिन उसकी क्वालिटी में राख ज्यादा है जो बड़े संयंत्र के माफिक नहीं होते. परमाणु ऊर्जा में यूरेनियम ईंधन है और उसका उत्पादन भी हमारे जरूरत के मुकाबले कम लग रहा है. उसकी खोज भी जारी है.

भारत के पास सौर ऊर्जा का विशाल और अपार भंडार है. हमारे वैज्ञानिक इस ऊर्जा क्षेत्र की शोध, खोज और उपयोग में जुट जायें तो भारत विश्व में हर समय उपलब्ध और कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा का अति सम्पन्न राष्ट्र हो जायेगा. सौर ऊर्जा पृथ्वी की सर्वप्रथम ऊर्जा है- यही जीवन है.

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