नई दिल्ली . वित्त वर्ष 2015-16 का बजट पेश होने में अब कुछ दिन ही बचे हैं. यहां कुछ वादों पर आम लोगों को आस है-

स्मार्ट सिटी
मोदी सरकार की यह महत्त्वाकांक्षी ढांचागत परियोजना है. जेटली ने पिछले बजट में इस परियोजना की घोषणा की थी और इसके लिए 7,060 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. वित्त वर्ष 2015-16 के बजट में इस मद में आवंटन खासा बढ़ सकता है. दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के अंतर्गत हाल में ही गुजरात के धोलेरा में भारत की पहली स्मार्ट सिटी विकसित करने के लिए निविदाओं को मंजूरी दी गई है. 12 बड़े बंदरगाहों में से हरेक के निकट एक स्मार्ट सिटी स्थापित करने की घोषणा की गई है, जिस पर 50,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा.

जीएसटी
पिछले बजट में जीएसटी के सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच गतिरोध समाप्त करने की घोषणा की गई थी. वित्त मंत्रालय ऐसा करने में सफल भी रहा है. पिछले साल दिसंबर में जीएसटी के क्रियान्वयन के लिए संविधान संशोधन विधयेक को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई. केंद्र को 1 प्रतिशत आपूर्ति पक्ष कर के रूप में रियायत देनी थी और राज्यों को मुआवजा देना पड़ा.
स्वच्छ भारत अभियान
पिछले साल 2 अक्टूबर को शुरू की गई यह योजना धीमी गति से चल रही है. पूरे साल के लिए 1.2 करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जो पूरा होता नहीं दिख रहा है. बजट में इसके लिए बड़े आवंटन की घोषणा हो सकती है.

गंगा सफाई अभियान
पिछले बजट में इस अभियान के लिए 2,037 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे. सरकार का दावा था कि दो साल में गंगा को निर्मल किया जा सकता है. बजट में इस अभियान के अंतर्गत कुछ और ठोस घोषणाएं हो सकती हैं.

किसान विकास पत्र
वित्त मंत्री ने पिछले बजट में यह योजना पुन: शुरू करने की घोषणा की थी. 8.7 प्रतिशत ब्याज की पेशकश के साथ यह योजना लोकप्रिय बनी रह सकती है. लेकिन च्अपने ग्राहक को जानिएज् (केवाईसी) पर स्थिति स्पष्टï नहीं होने की वजह से कुछ चिंताएं भी हैं. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस योजना में काले धन का इस्तेमाल भी हो सकता है.

व्यय प्रबंधन आयोग
केंद्र सरकार की व्यय और सब्सिडी नीति में बदलाव के लिए इस व्यय प्रबंधन आयोग के गठन की घोषणा की गई थी. पिछले साल सितंबर में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर विमल जालान के नेतृत्व में इस आयोग का गठन किया गया. आयोग ने जनवरी में अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंपी है. हालांकि अंतिम रिपोर्ट वित्त वर्ष 2016-17 के पहले आने की उम्मीद है, लेकिन इसके कुछ सुझावों को इस बार के बजट में शामिल किया जा सकता है.

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