21 जून की सुबह दिल्ली के राजपथ से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व में योग युग का प्रारंभ कर दिया. राजपथ योगपथ बन गया. जहां श्री मोदी की अगुवाई संयुक्त राष्टï्र द्वारा घोषित विश्व योग दिवस का विश्व भर में योग दिवस के रूप में लगभग 40 हजार लोगों ने 35 मिनिट के कार्यक्रम में पद्मासन से प्राणायाम तक 15 योगासनों का अभ्यास किया.

योग भारत की वैदिक काल के चिरकाल से आज तक भारतीय संस्कृति का अंग बने हुये हैं. यहां महापुरुषों की पदवियों में ‘योगीÓ और ‘योगी राजÓ कहा जाता है. भगवान श्रीकृष्ण सहस्रनामों में योगेश्वर भी कहलाते हैं.

आधुनिक युग में भी कई वैदिक रामकृष्ण मिशन जैसे कई मठों में योगासन भी साधना का अंग है. भारत में योग कई स्तरों पर चलता ही चला आ रहा है. 21 जून को यह भारत में प्रारंभ नहीं हुआ है, बल्कि आधुनिक जगत के परिप्रेक्ष्य में यह पहली बार विश्वव्यापी बना है.

श्री मोदी ने संयुक्त राष्टï्र में अपने भाषण में विश्व में योग दिवस मनाने की अपील की थी. 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया. इसके प्रस्ताव के 177 देश सह-प्रायोजक बने और संयुक्त राष्ट्र सहित 192 देशों ने इसे विश्व योग दिवस घोषित किया और इसे पूरी भव्यता से दुनिया में भारत में प्रारंभ किया. पूरा देश योगमय हो गया. सिचायिन की हिमालयी ऊंचाई से लेकर समुद्र तटों तक देश के हर भाग में हर राज्य व जिलों व अंदरूनी स्थानों में योग दिवस मनाया गया.

भारत की इस प्राचीन विधा योग को कुछ वर्षों पूर्व ही बाबा रामदेव ने अपने बहुचर्चित व्यक्तित्व से पूरे राष्ट्र में चर्चा व अभ्यास में ला दिया था. ये ‘योग गुरुÓ कहलाने लगे हैं लेकिन अब श्री मोदी की राजनैतिक व सांस्कृतिक पहल से अब योग-महायोग बन गया है.

राजपथ पर समारोह को प्रारंभ करते हुए अपने प्रारंभिक उद्बोधन में श्री मोदी ने कहा कि योग खुद की शक्ति-सामथ्र्य को पहचानने धन, बुद्धि, आत्मा, शांति, सद्भाव की विधा है. उन्होंने लोगों को परामर्श दिया कि योग पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. यह जीने का जरिया है.

योग के बारे में कुछ सामान्य निर्देश भी लोगों को बताये जा रहे हैं कि योग को योगाचार्यों द्वारा प्रशिक्षण पाने व उनकी निगरानी में होना चाहिए. योग के समय पेट खाली रहे. बीमारी या गर्भावस्था में योगाचार्य से परामर्श किया जाए.
श्री मोदी ने जनधन की योजना की तरह योग को भी जन जन तक पहुंचा दिया. यह छोटे स्कूलों से लेकर विद्यालयों तक पहुंच गया.

स्वस्थ व्यायाम के साथ स्वस्थ शरीर भी निर्मित होता है और इसके लिए केवल व्यायाम से काम नहीं चलेगा. लोगों को स्वस्थ और पौष्टिïक आहार भी मिलना चाहिए.

समाज में बड़े रेस्ट्रां से लेकर सड़क किनारों के फूड स्टाल पर ‘फास्ट फूडÓ ही मिलता है. रेलवे, बस स्टैण्ड पर भी यही है. अब मोदी सरकार को योग के नाम देश में ‘स्वच्छ-स्वस्थ आहारÓ अभियान चलाना चाहिए जो हर जगह उपलब्ध रहे. व्यायाम और आहार एक-दूसरे के पूरक हैं.

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