भारत में योजनाबद्ध विकास की मूल कल्पना पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी और उन्हीं ने इसे अपने अनूठे ढंग से क्रियान्वित भी किया. आजादी के बाद भारत के समक्ष सबसे बड़ी समस्या पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों को बसाने की थी और उसी के साथ लंबी गुलामी के बाद विकासहीन देश को विकास की राह पर लाना था.

उन्होंने एक योजना आयोग बनाया जिसका सबसे बड़ा महत्व यह था कि प्रधानमंत्री ही इसके पदेन (एक्स आफीशियो) अध्यक्ष होते थे. इसीलिये इसका संचालन उसके उपाध्यक्ष के पास होता है और उसे केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त रहा.
केंद्र के साथ-साथ हर राज्य की अपनी-अपनी पंचवर्षीय योजना होती थी जिसे योजना आयोग स्वीकृत करता था और फंड की व्यवस्था करता था. इसीलिए योजना आयोग को ‘सुपर केबिनेटÓ कहा जाता था. यह राष्टï्र के आर्थिक विकास की धुरी था जिसके इर्द-गिर्द देश का विकास पंचवर्षीय योजनाओं के रूप में चलता रहा.

योजना आयोग के कारण ही देश में विकास का रूप कभी भी ‘विभागीयÓ नहीं रहा बल्कि संपूर्ण विकास में वह संतुलन के साथ समाहित होता था. इसमें राजनीति कतई नहीं होती थी. पूरा राजनैतिक, प्रशासनिक नजरिया आर्थिक ही रहता था. इसकी वजह से ही देश का योजनाबद्ध विकास कार्य पूरी तरह से आर्थिक मार्ग पर ही चलता रहा.

लेकिन 1977 में जनता पार्टी के सत्ता में आने पर देश के विकास में राजनैतिक दृष्टिï इसमें आ गयी और इसका आर्थिक रूप बिगडऩे लगा. जनता सरकार के प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने पंचवर्षीय योजना को एक वर्षीय कर उसे ‘रोलिंग प्लानÓ का नाम दे दिया जो जनता सरकार के चलते उखड़ते रूप में ही जनता सरकार के साथ ही ध्वस्त हो गया. श्रीमती इंदिरा गांधी सत्ता में वापस आयीं और योजना आयोग को मूल रूप में लाया गया लेकिन वह उस रूप में नहीं आ पाया या चल सका जो उसका मूल रूप था. राज्यों में विभिन्न दलों की सरकारें आने जाने लगीं और देश में दिशा आर्थिक विकास से कहीं ज्यादा राजनैतिक उखाड़-पछाड़ की हो गयी और योजना आयोग उपेक्षित ही होता गया. इसके अंतिम प्रभावी उपाध्यक्ष कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार में श्री मोन्टेक सिंह अहलूवालिया थे.

भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने इसका नाम ही मिटा दिया और इसे या इसकी जगह एक संगठन को नीति आयोग के नाम से गठित किया. इन दिनों यह कार्यरत् है. इसके अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही पदेन होते हैं. अब इसने योजना को एक नया रूप 15-7-3 सालों के रूप में निर्मित किया है. प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नीति आयोग की बैठक में मुख्य मंत्रियों को भी बुलाया और राज्यों से कहा कि वे नये भारत के निर्माण में केंद्र सरकार के साथ जुट जायें. राज्यों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिये जुट जाएं. नीति आयोग ने तीन प्रकार की योजनाएं- (1) दीर्घावधि 15 साल (2) मध्यम अवधि 7 साल और (3) अल्पावधि- 3 साल की बनाई है.

मोदी सरकार ने योजना आयोग को खत्म करके नेहरू युग की पंचवर्षीय योजनाओं को भी खत्म करने की घोषणा कर दी थी.इसकी आखिरी 12वीं पंचवर्षीय योजना 31 मार्च 2017 को समाप्त होकर योजना आयोग खामोशी से समाप्त हो गया. अब नीति आयोग और उसकी त्रिवर्षीय 3-7-15 वर्षीय योजनाएं आ गयी हैं.

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