प्रशासनिक व्यवहारिता में न तो कहा जा सकता है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम को हटाया जा रहा है और न ही कहा जा सकता है कि उन्होंने दूसरे कार्यकाल से इंकार किया है.

उनका कार्यकाल 4 सितंबर को इसी वर्ष खत्म हो रहा है. यह एक शासकीय स्तर की उच्च नियुक्ति है. इसमें एक नियुक्ति का कार्यकाल तीन साल निर्धारित समय पूरा हो रहा है और वे पद मुक्त हो जायेंगे. जहां तक दूसरे तीन साल टर्म का सवाल है यह केंद्रीय मंडल के स्वत: निर्णय लेने का सवाल है. पत्रकारों के प्रश्नों पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी यही कहा था कि यह एक पद नियुक्ति का मामला है. यह कहना भी सही नहीं है कि श्री राजन ने दूसरा टर्म लेने से इंकार कर दिया. यह तभी होता जब उन्हें दूसरा टर्म आफर किया जाता. लेकिन इसमें जो कुछ भी हुआ है वह गवर्नर और प्रधानमंत्री व केंद्रीय वित्तमंत्री के बीच ही बात रहती.

उस पद के बारे में पहले कभी कोई विवाद इस तरह का नहीं हुआ. जैसे ही इस समय भाजपा सांसद श्री सुब्रमणियम स्वामी ने अकारण पैदा कर दिया. सारे विश्व में हर राष्टï्र में सरकार का एक केंद्रीय बैंक होता है. जैसे मौद्रिक क्षेत्र में पूरी स्वायत्तता दी जाती है. उसका कर्तव्य और दायित्व भी है कि वह मौद्रिक क्षेत्र से पूरी स्वायत्तता (आटोनॉमी) से फैसले ले और कहीं भी किसी देश में सरकार ऐसे फैसलों में परिवर्तन नहीं करती है. उसे जैसा का तैसा मान लिया जाता है. इनके फैसलों को वित्तीय कहा भी नहीं जाता है- इनके फैसलों का नामकरण मौद्रिक (मोनीटरी) होता है.

देश के बैंक अन्य वित्तीय संस्थाओं को दिशा-निर्देश से संचालित करते हैं, जरूरत पडऩे पर उनके काम तक रोक देते हैं. इनके कामों में देश में मनी सप्लाई और उनकी तरलता (लिक्वीडिटी) बनाये रखना भी है. इसके फैसले सी.ए.जी. (नियंत्रक महालेखा परीक्षण) की तरह होते हैं जो सरकारी खर्चों पर पूरी निष्पक्षता व सख्ती से टिप्पणी कर देते हैं और जिसकी रिपोर्ट सरकारों को जैसी की तैसी संसद व विधानसभाओं में रखनी होती है.

पिछले गवर्नर श्री डी. सुब्बाराव का कार्यकाल यू.पी.ए. शासन के अंतिम सालों में पूरा हुआ था और उसी सरकार को ही नई नियुक्ति भी करनी थी. रिजर्व बैंक के गवर्नर, कन्ट्रोलर एंड आडीटर जनरल, भारत के चीफ जस्टिस, मुख्य चुनाव आयुक्त सेनाओं के प्रमुख ये पद खाली नहीं रखे जा सकते. एक के जाने से पहले दूसरे नाम की घोषणा कई दिन पहले से ही कर दी जाती है.

श्री स्वामी ने इस गरिमा पद की गरिमा को जितना भी कम किया हो- केन्द्रीय सरकार व श्री राजन ने उसे जितना ठीक कर सकते हैं, उतना कर
लिया है.

श्री राजन ने कहा कि उन्होंने केन्द्र सरकार से वार्ता करने के बाद यह निर्णय लिया कि वे 4 सितम्बर को पदमुक्त हो जायेंगे. दूसरा कार्यकाल नहीं ले रहे हैं और अपने स्टाफ को अलविदा का पत्र भी
लिख दिया.