मुंबई,  चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 10 फीसदी घटकर छह साल में सबसे कम रहने के अनुमान हैं। इसकी वजह अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) में कम मांग बताई जा रही है, जहां विश्व की आधी विलासिता वस्तुओं की खपत होती है।

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर तक भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 13 फीसदी घटकर 2,145.87 करोड़ डॉलर रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 2,470.10 करोड़ डॉलर था। आभूषणों समेत विलासिता वस्तुओं की ताजा खरीदारी के लिए मदर्स डे के अलावा अन्य कोई बड़ा अवसर नहीं बचा है, इसलिए रत्न एवं आभूषण निर्यात में सुधार की कम संभावना है। हालांकि क्रिसमस और नव वर्ष के मौके पर अमेरिका में ग्राहकों का रुझान अच्छा था। अमेरिका में पूरे विश्व में उत्पादित होने वाले रत्न एवं आभूषणों की करीब 38 फीसदी खपत होती है। विकसित देशों में 45 दिनों का त्योहारी सीजन फरवरी में मदर्स डे के साथ समाप्त होता है और इस सीजन में सालाना बिक्री की 40 फीसदी बिक्री होती है।

इसके नतीजतन भारतीय निर्यातक रत्न एवं आभूषण निर्यात में मामूली सुधार आने की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन उनका अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष (2015-16) में निर्यात कम से कम 10 फीसदी घटेगा। मुंबई की एक आभूषण निर्यातक एशियन स्टार कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, च्क्रिसमस और नव वर्ष पर विकसित देशों में रत्न एवं आभूषणों की बिक्री पिछले अनुमानों से बेहतर रही। उसके आधार पर पूरे वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान उनके निर्यात में मामूली सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन अप्रैल से नवंबर तक के पहले 8 महीनों में रत्न एवं आभूषण निर्यात में 13 फीसदी गिरावट को देखते हुए चालू वित्त वर्ष 10 फीसदी गिरावट के साथ खत्म होने के आसार हैं।

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