245 सदस्यीय राज्यसभा में अभी भी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व का एन.डी.ए. बहुमत से दूर है. दोनों सदन अभी भी विपरीत बहुमत (क्रास परपज) बने रहेंगे. इस समय एन.डी.ए. (भाजपा- तेलगूदेशम- अकाली-शिवसेना) के 72, यू.पी.ए. (कांग्रेस, द्रमुक, केरल कांग्रेस) के 66 और अन्य (बसपा- सपा- अन्नाद्रमुक- तृणमूल, जनता दल यूनाईटेड राष्टï्रीय जनता दल) के 107 सदस्य है. 15 राज्यों में 57 स्थान रिक्त हुए थे. पहले दौर में ही नामांकन वापसी के बाद 30 सदस्य विभिन्न राज्यों से चुने जा चुके है. कांग्रेस के भूतपूर्व वित्तमंत्री श्री चिदम्बरम , जदयू के श्री शरद यादव, रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु, ऊर्जा मंत्री श्री पियूष गोयल, अम्बिका सोनी प्रमुख हैं. मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड व हरियाणा में चुनाव हुए इनमें जीतने वालों में श्री वैंकेया नायडू, निर्मला सीतारमण, मुख्तार अब्बास नकवी, एम.जे. अकबर, कपिल सिब्बल, जयराम रमेश, आस्कर फर्नांडिस रहे.

मध्यप्रदेश से भाजपा के श्री अनिल माधव दवे दूसरी बार भेजे गये है. पिछली बार पत्रकार श्री चंदन मित्रा भा.ज.पा. के सदस्य थे. इस बार उनके स्थान पर श्री एम.जे. अकबर भेजे गये हैे. मध्यप्रदेश में तीसरी सीट कांग्रेस के श्री विवेक तन्खा को गयी जो काफी सस्पेंस में चली. भारतीय जनता पार्टी का राजयोग कुछ बिगड़ा चला और कांग्रेस का संवरता चला गया. पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने घोषणा कर दी कि उनके 4 विधायक तन्खा को समर्थन करेंगे. बाद में कांग्रेस के जेल में बैठे विधायक श्री रमेश मन्देला को इस चुनाव के लिए जमानत मिल गयी. कांग्रेस के नेता श्री सत्यदेव कटारे को मुम्बई अस्पताल से ही मतदान के लिए पोस्टल बैलेट मिल गया.

दूसरी ओर जहां भाजपा घोड़ाडोंगरी से उपचुनाव जीत गयी वहीं उसके एक विधायक की दुर्घटना में मृत्यु हो गयी और एक विधायक को ठीक एक दिन पहले हृदयाघात हो गया.

उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी से बाहर कर दिये गये श्री अमर सिंह फिर से वापस ले लिये गये हैं और उन्हें राज्यसभा भेज दिया गया है. भाजपा ने अपना समर्थन देकर टीवी चैनल के संचालक श्री सुभाष चंद्रा को हरियाणा से राज्यसभा में भेजा है. राज्यसभा में भाजपा के सांसद रहे श्री राम जेठमलानी कालान्तर में भाजपा से विद्रोही हो गये और पार्टी ने उन्हें बाहर कर दिया. उन्हें इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के श्री लालू यादव ने लपक लिया और वे बिहार से राज्यसभा में राजद के सांसद हैं.

इसी चुनाव में श्री लालू यादव ने अपनी बेटी श्रीमती मीसा भारती को राज्यसभा में भेेजा है. मीसा भारती के पति देवेन्द्र प्रताप यादव लोकसभा में उत्तरप्रदेश से लोकसभा सांसद हैं.

राज्यसभा में तीन संविधान विशेषज्ञ एडवोकेट के रूप में श्री जेठमलानी, श्री तन्खा व श्री कपिल सिब्बल रहेंगे. वित्त विशेषज्ञ के रूप में श्री चिदम्बरम भी राज्यसभा में कांग्रेस की तरफ से पहुंच गये हैं.

दलगत राजनीति से हटकर सभी दलों को यह सोचना चाहिए कि ऐसी संवैधानिक व्यवस्था की जानी चाहिए कि दोनों सदन क्रास परपज (विपरीत बहुमत) के न हों. कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार भी ऐसी ही कठिन स्थिति को भोग चुकी है. बिहार में एक बार राष्ट्रपति शासन इसलिए रद्द हो गया कि उसे राज्यसभा ने मंजूर नहीं किया और व्यवस्था में वह संसद की मंजूरी नहीं माना गया.
संसद को अलग-अलग सदन के रूप में नहीं रहना चाहिए, उसमें राजनैतिक व संवैधानिक एकरूपता जरूरी है.

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