राज्य विधानसभा में वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया ने एक लाख 58 हजार 594 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियों का बजट प्रस्तुत किया और इसी वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य का कुल व्यय एक लाख 58 हजार 713 करोड़ रुपये अनुमानित है. दोनों में ऋणात्मक अंतर 118 करोड़ रुपये का है. इतने कम अंतर के कारण इसे घाटे का बजट नहीं कहा जा सकता. यह लगभग बराबर की आमदनी-खर्चे का संतुलित बजट है.

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है यह प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा बजट है और प्रदेश का पहिया सबसे तेज घूमेगा. कृषि क्षेत्र और संरचना पर विशेष ध्यान दिया जायेगा. केंद्र व राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और नीतिगत दृष्टिï से ‘मेक इन इंडियाÓ और प्रत्यक्ष विदेशी और घरेलू निवेश पर बहुत जोर है. वित्त मंत्री के भाषणों में यह बात सामने आ गयी है कि इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश केंद्र के साथ कदमताल में पीछे है. श्री मलैया ने स्वीकार किया है कि अधोसंरचना निर्माण में निजी निवेश में वृद्धि उत्साहजनक नहीं है. मैन्यूफेक्चिरिंग क्षेत्र में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं हुई है. सड़क मार्गों में यातायात में पहले की तरह वृद्धि नहीं हुई है. बजट की आमदनी खर्चे के बाद इतनी राशि नहीं बचती है कि त्वरित विकास किया जाए और वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेना होता है.

गत 10 वर्षों में 49779.36 करोड़ रुपयों का ऋण लिया और अधोसंरचना पर 633488.18 करोड़ रुपयों का निवेश किया. औद्योगिक वृद्धि दर कम रहने से राज्य के करों की प्राप्तियों में पहले की तरह उछाल नहीं मिल रहा है. राज्य में आयोजना व्यय कुल व्यय का 43.57 प्रतिशत है जो 84311 करोड़ रुपयों का है.
वित्त मंत्री ने प्रदेश के विकास के बारे में उत्साहवर्धक स्थिति भी बताई कि राज्य की अर्थव्यवस्था 10 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर से आगे बढ़ रही है.
केंद्र ने राज्यों को दी जा रही करों की हिस्सेदारी में इस हाथ दे और उस हाथ ले की नीति अपनायी है. जहां राज्यों को करों में दी जा रही हिस्सेदारी को 10 प्रतिशत बढ़ाकर 32 से 42 प्रतिशत कर दिया, वहीं विशिष्टï प्रयोजनों के लिये प्राप्त होने वाली अनुदान राशि 10 प्रतिशत घटाकर 30 से 20 प्रतिशत कर दी.

सामान्यत: यही देखने में आता है कि राज्यों में जब भी कोई बाढ़, सूखा, पाला या अन्य कोई बड़ी विपदा आती है तो सभी राज्य सरकारें केंद्र से अतिरिक्त अनुदान की मांग करती हैं, उसमें कटौती इस राज्य पर भारी पड़ेगी.
राज्य में कृषि क्षेत्र में खरीफ में अल्प वर्षा, वर्षा के दिनों में लंबे अन्तराल और तेज गर्मी में फसलों को काफी नुकसान रहा, लेकिन अरहर दाल, मक्का व कपास की फसलें ठीक रहीं. धान की फसल सामान्य है. रबी की गेहूं, चना, मसूर व सरसों की स्थिति संतोषजनक है.
आजादी से पहले से ही मध्यप्रदेश में होशंगाबाद-इटारसी के बीच पवारखेड़ा में कृषि का प्राइमरी और मिडिल स्कूल संभवत: राज्य और देश का प्रथम कृषि स्कूल है. सरकार ने यह बहुत ही मुखर निर्णय लिया है कि पवारखेड़ा में इस वित्त वर्ष में नवीन कृषि महाविद्यालय स्थापति किया जायेगा. विगत 10 वर्षों में कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान अधोसंरचना के विस्तार हेतु राज्य सरकार ने नये कृषि महाविद्यालय स्थापति किये हैं. पहले की सरकारें सीहोर में कृषि महाविद्यालय और जबलपुर में कृषि विश्वविद्यालय स्थापित कर ही चुकी हैं.
इस वर्ष के बजट में शिक्षा पर 300 करोड़ व माध्यमिक शिक्षा अभियान पर 495 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है.

भारत सरकार देश में दो नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेन्टर स्थापित करने जा रही है. उनमें से एक मध्यप्रदेश में स्थापित होगा. उद्योगों की स्थापना के लिये अधोसंरचना विकास तथा प्रोत्साहन सहायता हेतु 2462 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है. भोपाल, ग्वालियर तथा जबलपुर में आई.टी. पार्क स्थापना का कार्य इसी वित्तीय वर्ष में पूरा होने की पूरी संभावना है.

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