राज्य का वर्ष 2015-16 का बजट लगभग संतुलित है. राजस्व प्राप्तियां 1 लाख 14 हजार 422 करोड़ रुपयों की होना अनुमानित है. शुद्ध लेन-देन में राजस्व प्राप्तियां 1 लाख 30 हजार 815 करोड़ रुपये तथा कुल व्यय 1 लाख 31 हजार 199 करोड़ अनुमानित है. शुद्ध लेन देन 383 करोड़ और अंतिम शेष ऋणात्मक 513 करोड़ अनुमानित है. राजकोषीय घाटे का अनुमान 16 हजार 745 करोड़ है जो सकल घरेलू उत्पाद का 2.99 प्रति होगा और यह निर्धारित सीमा है.

इस सरकार के 12वें बजट से यह तो स्थापित हो गया कि राज्य की वित्तीय स्थिति काफी सुखद व सुदृढ़ है. अन्यथा अन्य भागों में तीव्र विकास के नाम पर छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना जैसे पृथक राज्यों की मांग की जाती है और इनका निर्माण होने पर केंद्र के आगे विशेष आर्थिक पैकेज के लिये हाथ फैला दिये जाते है. वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनके बजट का आधार विकास और इसकी पहचान सामाजिक सरोकार है. कुशल वित्तीय प्रबंधन के परिणाम स्वरूप राज्य की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 11.08 प्रतिशत है. राज्य पर ब्याज चुकाने का जो भार वर्ष 2003-04 में 22.44 प्रतिशत था वह वर्ष 14-15 में घट कर 6.57 प्रतिशत होने जा रहा है. प्रदेश में पिछले 10 सालों सेें राजस्व आधिक्य में है. केंद्र सरकार द्वारा करों की आय में राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया है. इसमें भी राज्य की वित्तीय स्थिति बहुत सुदृढ़ होने जा रही है.
राज्य की उन्नति व विकास के लिए वर्ष 15-16 में आयोजन व्यय का बजट अनुमान 60 हजार 348 करोड़ है. राज्य सरकार आयोजना पर कुल व्यय का 45.99 प्रतिशत भाग खर्च करने जा रही हैं. पूंजीगत परिव्यय 22 हजार 364 करोड़ रुपए प्रस्तावित है और योजनेतर व्यय का अनुमान 70 हजार 850 करोड़ रुपये है. विकास पर होने वाले व्यय का प्रतिशत और आगे बढ़ाकर 50 प्रतिशत होना ही चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि प्रशासन व्यय कम किया जाए.
कराधान व कर मुक्ति में कृषि को प्राथमिकता दी गई है. शक्ति चलित कृषि यंत्रों को कर मुक्त किया गया है. सस्ते जूते-चप्पल भी कर मुक्त हो रहे हैं. शिक्षा में काम आने वाली स्टेशनरी को भी कर मुक्त किया जाना स्वागत योग्य है. महिलाओं के लिए भी अच्छी खबर है कि उन्हें ड्रायविंग लायसेंस शुल्क में पूर्ण छूट दी गयी है. 40 घरेलू उपयोग की वस्तुओं पर वेट की दर 13 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी
गयी है.

यह भी बहुत स्वागत योग्य स्वास्थ्यवर्धक कदम है कि बिना तम्बाकू वाले पान मसालों व गुटके पर वेट की दर 13 प्रतिशत से बढ़ाकर दुगने से भी ज्यादा 27 प्रतिशत की जा रही है. राज्य में तम्बाकू वाला गुटका पर प्रतिबंध है पर यह फर्जी तौर तरीके से बिना तम्बाकू के गुटका की आड़ में अवैध तरीके से बेचा जा रहा है. रेत-गिट्टी व फ्लोरिंग स्टोन पर कर बढ़ाने से बिल्डर्स बूम के भारी मुनाफे से राज्य ने दरें बढ़ाकर राज्य की आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया है.
पेट्रोल-डीजल सस्ते होने से आम जनता तो सुखी है पर राज्य सरकार दुखी है क्योंकि टेक्सों में कमी आने से उसकी आमदनी कम हो रही है. इसलिये श्री मलैया ने इस बजट में सीएनजी के आयात पर 10 प्रतिशत प्रवेश कर लगा दिया है. बजट से पहले ही राज्य सरकार पेट्रोल व डीजल पर वेट की दरें बढ़ा चुकी है.

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