देश के कई भागों में इस्लामी और नक्सली आतंकियों का आतंक चल ही रहा है. लेकिन मध्यप्रदेश में कुत्ते और गुंडे आतंकवादी बने छा चुके हैं. सडक़ों व घरों में ही इन दोनों से कोई सुरक्षित नहीं है. महिलाएं व लड़कियां अगर अपने परिवार या साथियों के साथ भी हैं तो वे सुरक्षित नहीं हैं.

राज्य की पूरी जनता सडक़ों पर कुत्तों के आतंकवादी हमलों के आगे लाचार हो गई हैं- कोई शासन व्यवस्था ‘पशु कल्याण’ के नाम पर जन कल्याण को छोड़ चुके हैं. राजधानी भोपाल के कोहेफिजा में एक बच्चा स्कूल बस पकडऩे लपका और कुत्ते उस पर लपक पड़े और मार डाला. दो बहुत ही छोटे बच्चे घर के सामने बैठे थे- कुत्ते उन्हें घसीट कर ले गए और खा गए. भोपाल में एक महिला स्कूटी से जा रही थी.

कुत्तों ने उस पर हमला कर गिरा दिया और काट लिया. राजधानी की एक कालोनी के लोग कुत्तों के आतंक से परेशान एक थाने में धरना देकर बैठ गये. पुलिस की परेशानी यह है कि कुत्तों के खिलाफ एफआरआई नहीं होती. नगर निगम का यह हाल है कि वह कुत्तों की नसबंदी कर रही है और हकीकत यह है कि शहर में कुत्तों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. अब वे इक्का दुक्का नहीं बल्कि झुंड में सडक़ों पर अतिक्रमण कर चुके हैं.

राज्य भर के नगर निगम के मकानों का जमीनों का काम अतिक्रमण के साथ-साथ कुत्तों का भी अतिक्रमण खत्म करें या तो इन्हें गोली मार दी जाए या जंगलों में छोड़ा जाए. अभी जहां से पकड़ते हैं वहीं लाकर छोड़ देते हैं. जबलपुर में एक हृदयविदारक समाचार आ गया कि वहां आवारा कुत्तों ने दो बच्चों को मार डाला. अस्पतालों में एंटीरेबीज के इंजेक्शन की कमी बनी रहती है. कुत्ते काटने के मामले ज्यादा और इंजेक्शन सप्लाई कम होते हैं.

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