प्रीति रघुवंशी आत्महत्या

उत्तर प्रदेश के उन्नाव कांड पर पूरे देश में यूपी की योगी सरकार की साख को जो बट्टा लगा है, उसका हश्र देखकर क्या मंत्री रामपाल से जुड़े रायसेन के उनकी बहू प्रीति आत्महत्या कांड पर ‘लीपापोती’ कर रही मध्यप्रदेश की पुलिस और सरकार क्या कोई सबक लेने जा रही है?

उन्नाव में रेप और हत्या के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की दबंगई के आगे रेंगती रही यूपी पुलिस ने मुख्यमंत्री योगी की निरन्तर उज्जवल हो रही छवि को खाक में मिलाकर रख दिया है.

हाईकोर्ट में सरकार का यह कहना कितना शर्मनाक रहा है कि आरोपी विधायक के खिलाफ कोई सबूत नहीं है जबकि उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर पास्को एक्ट लगाया गया था.

कल देर रात जब दिल्ली के इंडिया गेट पर कुछ ही समय में राहुल गांधी के आव्हान पर हजारों लोगों की भीड़ आक्रोशित होकर एकत्रित हो गई तब सरकारों की आंखें खुलीं और कुलदीप को गिरफ्तार किया गया. लेकिन यूपी की कुलदीप के आगे ‘धूजती और कांपती’ पुलिस की वजह से जो राष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी होना थी वह हो चुकी है.

इस साख को पुन: दुरुस्त करने में अब वक्त लगेगा. मध्यप्रदेश सरकार में दबंग माने जाने वाले मंत्री रामपाल की पुत्र-वधु प्रीति रघुवंशी की आत्महत्या कांड में लगभग एक माह बाद भी एफआईआर तक दर्ज नहीं करना- रायसेन पुलिस को भी पूरे देश और खासकर मध्यप्रदेश में चर्चित कर रहा है.

मंत्री रामपाल के दबाव में पुलिस कार्रवाई करने का ‘मंचन’ कर रही है लेकिन प्रीति के पति गिरिजेश और मंत्री रामपाल के परिजनों को ‘स्पर्श’ तक नहीं कर पा रही है. उल्टे यहां प्रीति का भाई दीपक रघुवंशी ‘पुलिस प्रायोजित गायब’ प्रीति के परिजन गुहार कर रहे हैं कि कहीं उसके साथ अनर्थ न हो जाए. यहां यह बिंदु उल्लेखनीय है कि उन्नाव में पीडि़ता के पिता की दबंग विधायक के परिजनों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

इधर प्रदेश की एक बिटिया अपने पत्नी के अधिकारों को पाने से वंचित किये जाने के कारण अपनी जान दे दे, उसके परिजन चीख-चीख कर प्रीति को न्याय दिलाने की मांग करें, प्रतिपक्ष न्याय यात्राएं निकाले, रघुवंशी समाज हर दिन मोर्चा निकाले, प्रदेश का आम आदमी- इस अन्याय के प्रति दुखी हो और पुलिस टस से मस न होकर मंत्री के दबाव में एफआईआर तक नहीं लिखे, तब इसे कौन सी व्यवस्था कहा जाएगा? इसे म.प्र. सरकार का कौन सा सुराज कहा जाएगा, जिसमें आरोपों से घिरे मंत्री रामपाल को वह हटा नही पा रही है? दबंग मंत्री के आगे कहां सुनी जा रही है गरीब परिवार की आवाज?

उन्नाव कांड की परिणति को लेकर क्या म.प्र. पुलिस सबक लेगी? उन्नाव में न केवल कुलदीप को अंतत: गिरफ्तार करना पड़ा अपितु दोषी पुलिस अफसरों और डाक्टरों पर गाज गिराई जा रही है. लोकतंत्र में कार्यपालिका एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. इनकी जवाबदारी पीडि़तों को न्याय दिलवाने की होती है. फिर चाहे पुलिस के सामने मंत्री रामपाल का दबाव ही क्यों न हो, उसे प्रीति की आत्मा को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष होकर कार्रवाई को अंजाम देने का साहस दिखाना चाहिए.

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