ram_naikवाराणसी,  उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज कहा कि जनतंत्र में हर प्रकार के विचारों का आदान-प्रदान करना आवश्यक होता है, लेकिन इसको लेकर यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो इस तरह के मुद्दे पर निश्चित तौर पर विचार करना चाहिए । श्री नाईक आज यहां संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे ।

कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं द्वारा रामजन्म भूमि के मुद्दे पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) परिसर में आयोजित सेमिनार पर हुए विवाद के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘देश में जंनतंत्र है और इस प्रकार का कोई कार्यक्रम आयोजित कर अपने विचार व्यक्त करें तो उसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसमें किसी प्रकार से कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो निश्चित तौर पर उसपर विचार करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि विचारों का प्रतिबंध लगाना गलत बात होगी। विचार अपने-अपने ढंग से लोग व्यक्त करते हैं।

आर्थिक, धार्मिक तथा साहित्यिक विचारों में मतभेद हो सकते हैं। उसे व्यक्त करना जनतंत्र में निहित बात है, जो हो सकते हैं और होना भी चाहिए, लेकिन चर्चा का स्तर ऐसा हो जिसके आधार पर समाज को कुछ अच्छी दिशा मिले।”

गौरतलब है कि राम जन्मभूमि मंदिर के मुद्दे पर एक संस्था द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में कल एक सेमिनार का आयोजन किया गया था, जिसका कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई समेत अनेक संगठनों ने यह कहते हुए जोरदार विरोध किया था कि विवादित मुद्दे पर शैक्षणिक संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित होने से माहौल खराब होगा।

 

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