भारत के 14वें राष्टपति के लिये 15वें चुनाव की अधिसूचना भारत के चुनाव आयोग ने 14 जून को जारी कर दी और उसी के साथ नामांकन शुरू हो गये जो 28 जून तक भरे जायेंगे. नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) 29 जून को होगी और चुनाव 17 जुलाई को होगा. वर्तमान राष्टï्रपति श्री प्रणव मुखर्जी का पांच साल का कार्यकाल 24 जुलाई को होगा.

कहने को तो पहले ही दिन 63 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे हैं जो या तो नाम वापस ले लेंगे या स्क्रूटनी के बाद खारिज होना ही है.

वास्तविक उम्मीदवारों का नामांकन तो सत्ता पक्ष भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष की कोई पार्टी या संयुक्त विपक्ष का कोई उम्मीदवार ही होगा. औपचारिकता में ऐसे चुनाव के वक्त सत्ता पक्ष की ओर से यह शिष्टïाचार के नाते कहा ही जाता है कि वह इस संवैधानिक पद के आम सहमति का उम्मीदवार तय करने के लिये प्रयास करेगा.

लेकिन शिष्टïाचार के दायरे में भी वास्तविकता यह रहती है कि सत्ता पक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करता है और विपक्षी पार्टी या संयुक्त विपक्ष सांकेतिक (टोकन) रूप में किसी को खड़ा कर देना है और जीत सत्ता पक्ष की उम्मीदवार की ही होती है.

अब तक 13 व्यक्ति भारत के राष्टï्रपति रह चुके हैं. इनमें से दो की डॉक्टर जाकिर हुसैन और श्री फखरुद्दीन अली अहमद की पद पर रहते हुए मृत्यु हो गयी. भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हिदायत उल्ला और उपराष्टï्रपति श्री बी.डी. जट्टी कार्यवाहक राष्टï्रपति बने.

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होते ही संविधान सभा के अध्यक्ष डाक्टर राजेंद्र प्रसाद को राष्टï्रपति बनाया गया. वे लगातार दो टर्म (10साल) राष्टï्रपति रहे. उनका कार्यकाल 26 जनवरी 1950 में 13 मई 1962 तक रहे. इसके बाद किसी भी राष्टï्रपति को एक के बाद दूसरा टर्म नहीं दिया गया.

अब तक के राष्टï्रपतियों में क्रमवार और राज्य में इस प्रकार रहे (1) डाक्टर राजेंद्र प्रसाद (बिहार) (2) डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णनन (तमिलनाडु) 13 मई 1962 से 13 मई 1967) (3) डाक्टर जाकिर हुसैन (दिल्ली) 13 मई 1967 से 3 मई 1969 पद पर ….. उप राष्टï्रपति श्री वी.वी. गिरी कार्यवाहक राष्टï्रपति बने और बीच में ही इस्तीफा दे दिया. इस कारण भारत के मुख्य न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला कार्यवाहक राष्टï्रपति बने.

श्री गिरी राष्टï्रपति का चुनाव लड़कर राष्टï्रपति चुने गए और पुन: राष्टï्रपति पद पर आ गये और उनका कुल कार्यकाल 3 मई 1969 से 20 जुलाई 1969 और 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक रहा. अब तक के एकमात्र ऐसे राष्टï्रपति थे जो निर्दलीय उम्मीदवार थे और उन्होंने सत्ता …… कांग्रेस के उम्मीदार श्री संजीव रेड्डïी को हराया था. इस समय श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं और यह माना जा चुका कि श्री गिरी उस समय श्रीमती गांधी के उम्मीदवार थे और उन्होंने उन्हें निर्दलीय रूप में जिताया. उस समय कांग्रेस ने इंदिरा कांग्रेेस व सिन्डीकेट कांग्रेस के नाम से दो घटकों में तीव्रतम अंदरूनी टकराव चल रहा था.

(5) श्री फखरूद्दीन अली अहमद (असम) 24 अगस्त 1974 से 11 फरवरी 1977 तक पद पर ही मृत्यु और उपराष्ट्रपति श्री बी.डी. जेट्टïी कार्यवाहक राष्टï्रपति 11 फरवरी 1979 से 25 जुलाई 1983….. तक रहे. अन्य सभी राष्टï्रपति कांग्रेस पक्ष के थे. 1977 में आपातकाल के बाद जयप्रकाश नारायण और जनता पार्टी का दौर आया. इसमें जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में श्री नीलम संजीव रेड्डïी (आंध्र) चुने गये. ये कांग्रेस सत्ता संघर्ष में श्री गिरी से हार चुके थे. इनका कार्यकाल 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1983 तक रहा. इसी बीच जनता पार्टी का दौर ध्वस्त हो गया और कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में (7) ज्ञानी जेल सिंह (पंजाब) चुने गये जो 25 जुलाई 1983… से 25 जुलाई 1987 तक रहे. इनके बाद (8) श्री आर. वेंकटरमन (तमिलनाडु) 25 जुलाई 87 से 25 जुलाई 97 तक रहे. नवें (9) राष्टï्रपति के रूप में डाक्टर शंकरदयाल शर्मा (मध्यप्रदेश) 25 जुलाई 1962 से 25 जुलाई 1997 तक रहे. 10वें राष्टï्रपति भारत मिसाइल सेना डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (तमिलनाडु) 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई तक रहे. इन्हें निर्दलीय होने के बाद भी सर्वदलीय उम्मीदवार कहना ज्यादा उपयुक्त होगा. ये साझा सरकारों का दौर था. 11वें राष्टï्रपति के रूप में कांग्रेस की श्रीमती प्रतिभा पाटिल (महाराष्टï्र) थी. जो 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2012 तक रहीं. इन्होंने भारत की प्रथम महिला राष्टï्रपति होने का रिकार्ड बनाया और 12वें राष्टï्रपति के रूप में श्री प्रवीण मुखर्जी (पश्चिम बंगाल) अगले माह की 24-25 जुलाई तक राष्टï्रपति पद पर हैं.

नये नाम की तलाश सत्ता पक्ष व विपक्ष में जोरों से जारी है कि जो 28 जून तक सामने आना ही है. सत्ता पक्ष की और से संकेतों में श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्रीमती सुषमा स्वराज, लोकसभा स्पीकर श्रीमती सुमित्रा महाजन, मणिपुर की गवर्नर नजमा हेपतुल्ला और झारखंड की आदिवासी गवर्नर द्रोपदी मुमू चर्चा में है. अयोध्या मामले में श्री लालकृष्ण आडवाणी पर अदालत में चार्जशीट लग चुकी है. इसलिए यह माना जा रहा है कि वे अब इस कारण राष्टï्रपति की दौड़ में नैतिक आधार पर बाहर हो गए. लेकिन कानूनी रूप में यह भी अयोग्यता (डिसक्वालिफिकेशन) नहीं है. यदि वे चुने जाते है तो जब तक वे राष्टï्रपति पद पर रहते है और उन मुकदमा नहीं चल सकता. यह मामला मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री रामनरेश यादव के मामले में मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट ने तय कर दिया है. उन पर व्यापमं मामले में एफआईआर दर्ज की जा रही थी. उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी कि वे जब तक गवर्नर के संवैधानिक पद पर हैं उनके खिलाफ एफआईआर या मुकदमा नहीं चल सकता. हाईकोर्ट ने इसे माना और श्री यादव पर एफआईआर या केस नहीं कायम हुआ.

यह उदाहरण श्री आडवाणी के मामले में कानूनी उदाहरण बन सकता है. फिलहाल सत्ता व विपक्ष में शिष्टाचार की बातें हो रही हैं लेकिन लगता है सत्ता पक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा.

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