पार्टी युवा नेतृत्व के सहारे नई सोच के साथ बदलती चुनौतियों से लोहा लेगी

नई दिल्ली,

कांगे्रस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने को लेकर कई महिनों से जारी कयास अब खत्म हो गया है. दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में चुनावी औपचारिकता खत्म होने के बाद राहुल गांधी 130 साल पुरानी पार्टी को नई दिशा देने की शुरूआत करेंगे.

उनके अध्यक्ष पद धारण करने के साथ ही संगठन में बड़े बदलाव की संभावना बढ़ जाएगी. पावर सेंटर एक होने के कारण न सिर्फ नई नीतियों को आगाज होगा बल्कि प्रांतिय व राष्ट्रीय स्तर पर नए नेताओं का उदय भी होगा. इसलिए माना जा रहा है कि पार्टी युवा नेतृत्व के सहारे नई सोच के साथ बदलते चुनौतियों से लोहा लेगी.

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि राहुल के हाथ पार्टी की औपचारिक कमान आने के साथ ही न सिर्फ सांगठनिक स्वरूप बदलेगा बल्कि चुनौतियां भी बदलेगी.

इतना ही नहीं पार्टी के दिग्गज व वरिष्ठ नेताओं के साथ सामंजस्य बैठाकर विरोधियों के खिलाफ रणनीतिक मोर्चाबंदी करने की जिम्मेदारी भी राहुल को आगे बढ़कर निभानी होगी.

जानकार मान रहे हैं कि राहुल को परंपरागत राजनीति को एकदम से बदलने के बजाय इसे विरासत के तौर पर संभाल कर, उसके सहारे आगे बढऩे की रणनीति तैयार करनी होगी.

वैसे तो वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव में कमी कई महिनों से दिखने लगी है लेकिन इसके बाद भी गुजरात चुनाव में जिस तरह से राहुल ने वरिष्ठों को महत्व दिया है वह उनके दूरगामी सोच का परिणाम दिख रहा है.

जानकार मान रहे हैं कि भाजपा के तर्ज पर वरिष्ठों को किनारे लगाने की रणनीति को राहुल ने कभी भी समर्थन नहीं किया बल्कि वे समय-समय पर उनके अनुभवों के सहारे आगे बढ़े है. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि राहुल गांधी की टीम में वरिष्ठों का स्थान नहीं होगा.

हां इतना जरूर है कि नेतृत्व के निर्णय में वरिष्ठों का हस्तक्षेप कम होगा और नेतृत्व कोटली के साए से मुक्त होगी.हालांकि सपा, राजद, डीएमके जैसे देश के ज्यादातर क्षेत्रीय पार्टियों ने अपने युवा नेताओं को आगे बढ़ा रखा है ऐसे में उनसे सामंजस्य बैठाना बहुत कठीन नहीं होगा.

फिर भी माना जा रहा है कि वामदल, टीएमसी जैसे कुछ दलों को साधने के लिए राहुल को अपने वरिष्ठ रणनीतिकारों से आरंभिक मदद लेनी होगी. प्रेक्षक मान रहे हैं कि भाजपा के साथ अब आमने सामने की लड़ाई में पार्टी को ज्यादा फायदा हो सकता है.

देश के युवा राहुल गांधी के मैदान में होने से ज्यादा प्रभावित होंगे. बहरहाल, पार्टी 2019 की तैयारी के क्रम में राहुल गांधी को आगे करके दूर की राजनीति की है.

 

 

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